STORYMIRROR

SHUBHANGI SHINDE

Abstract

4  

SHUBHANGI SHINDE

Abstract

यादें...

यादें...

1 min
240

यादोंका क्या है याद आती ही हैं

गम हो या खुशी यादें आती हैं


कुछ यादों से पलके नम होती हैं

यादें बुरी हो तो गम में

यादें अच्छी हो तो खुशी से 


बचपन की यादें भी बहुत खास होती हैं

मासुम सा फीर बच्चा बन जाने को कहती हैं

बचपन के वो शरारती दिन लौट आने को कहती हैं


दोस्ताने वाली यादें भी बडी दिलचस्प होती हैं

दोस्ती का हर एक पल दिल को सुकून दे जाती हैं

तक्रार में अपनी गलतीयाॅं भी समज आती हैं

अभी देर नहीं हुई हैं ये बतला जाती हैं


जिंदगी की हर मोड़ पर यादों का बसेरा हैं

कुछ यादें खट्टी हैं, कुछ यादें नमकीन हैं,

कुछ यादें तिखी हैं, कुछ यादें कडवी हैं,

कुछ यादें शहद से भी मीठी हैं


यादों का क्या है यादें तो याद आती ही हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract