दिखावा
दिखावा
सफर जिंदगी का अजीब है,
उसमे दिखावे की अहमियत बड़ी है।
हर चेहरे पे चेहरा है दिखावे का,
ना कर जमाना दिखावा अपनेपन का।
यहां अपने हो जाते पराये,
खुद्दारी का नकाब पहनकर गुमते सारे।
खुदासे भी डरले,झूठे दिखावे से बचले।
झूठी शान कभी टिकती नहीं,
असलीयत कभी छूपती नहीं,
दिखावा उनका देखकर,
उनकी आदत सी हो गई थी हमें।
आयेनेमे देखकर अपनेआप को अगर समज लेते,
उनका दिखावा खुदही समज लेते।
न फसता मृदुल मन कभी महोब्बत में,
इश्क में न होते यूँ बदनाम जमाने में।
अगर करते इतनी महोब्बत खूदा से,
तो शायद खुदा भी आसानी से मिल जाते।
