दीप
दीप
दीप आज जल रहा है ।
कल भी उसको जलना होगा।।
इस अंधेरे रास्तों पर ।
रोशनी करना होगा ।।
आज जो हम सोच रहे हैं।
कल वह एक नई राह देगा ।।
अपने मन के भीतर झांक ले तू ।
कुछ नया अंजाम देगा ।।
रह गई बात उजाले की।
तो होती रहेगी।।
हम रहे या ना रहे।
दीप की बात होती रहेगी ।।
दीप आज जल रहा है ।
कल भी उसको जलना होगा।।
इस अंधेरे रास्तों पर ।
रोशनी करना होगा ।।
