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राम शरण सेठ

Abstract

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राम शरण सेठ

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दीप

दीप

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दीप आज जल रहा है ।

कल भी उसको जलना होगा।।

 इस अंधेरे रास्तों पर ।

रोशनी करना होगा ।।

आज जो हम सोच रहे हैं।

 कल वह एक नई राह देगा ।।

अपने मन के भीतर झांक ले तू ।

कुछ नया अंजाम देगा ।।

रह गई बात उजाले की।

 तो होती रहेगी।।

 हम रहे या ना रहे।

 दीप की बात होती रहेगी ।।

दीप आज जल रहा है ।

कल भी उसको जलना होगा।।

 इस अंधेरे रास्तों पर ।

रोशनी करना होगा ।।



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