Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Inspirational Thriller
धुआं
की
तरह
हो
गई
है
जिंदगी
जिस
प्रकार
ऊपर
उठकर
विलीन
जाता
उसी
भी
अंत
में
अंततः
जाती
शनै
प्रेम सर्वव्य...
प्रेम निशब्द
प्रेम
सही मायने में...
प्रेम और नफरत
प्रेम को परिभ...
ज्ञान के बिना जीवन भारी पड़ेगा ज्ञान के बिना जीवन भारी पड़ेगा
मेरी कलम का सफर है बड़ा सुहाना, जब लिखने बैठती लगता भावों का आना जाना। मेरी कलम का सफर है बड़ा सुहाना, जब लिखने बैठती लगता भावों का आना जाना।
हौसला फिर जगमगाया देर तक जलती रातों को बुझाया देर तक। हौसला फिर जगमगाया देर तक जलती रातों को बुझाया देर तक।
हे मेरी प्यारी गौरैया तुम मुझे लगती हो प्यारी। हे मेरी प्यारी गौरैया तुम मुझे लगती हो प्यारी।
एक में बहती प्रेम-अपनेपन की धारा दूसरे में कर्तव्य प्रथम है।। एक में बहती प्रेम-अपनेपन की धारा दूसरे में कर्तव्य प्रथम है।।
तुम्हें ढूँढा बहुत था हमने पर तुम चली गई। तुम्हें ढूँढा बहुत था हमने पर तुम चली गई।
पर वादा करो अंतिम इच्छा पूरी करोगे अगले जन्म भी यही मेरा कबीला हो....... पर वादा करो अंतिम इच्छा पूरी करोगे अगले जन्म भी यही मेरा कबीला हो.......
कभी-कभी तस्वीरें कुछ लिखने का बहाना बन जाती हैं कभी-कभी तस्वीरें कुछ लिखने का बहाना बन जाती हैं
मोक्ष की प्राप्ति होगी अगर कर लो इसे पूर्ण स्वीकार। मोक्ष की प्राप्ति होगी अगर कर लो इसे पूर्ण स्वीकार।
मानवता के धर्म की श्रेष्ठता का तुम नया इतिहास तो लिखो। मानवता के धर्म की श्रेष्ठता का तुम नया इतिहास तो लिखो।
रोक लो.. कदम.. अंदर बाँधो। मास्क कल्चर अभी सब साधो॥ रोक लो.. कदम.. अंदर बाँधो। मास्क कल्चर अभी सब साधो॥
यही है जीवन का पूरा ज्ञान कभी ना करो किसी का भी अपमान। यही है जीवन का पूरा ज्ञान कभी ना करो किसी का भी अपमान।
आज फिर तेरी याद ताजा कर बैठा, मेरी किताब में दबा वो सूखा गुलाब। आज फिर तेरी याद ताजा कर बैठा, मेरी किताब में दबा वो सूखा गुलाब।
जो भी हो मनुष्यता आधुनिकतम औजार है बदलाव का का और कुछ बदल रहा है। जो भी हो मनुष्यता आधुनिकतम औजार है बदलाव का का और कुछ बदल रहा है।
जैसे खिलौना निष्प्रयोज्य हो फेंक दिया जाता। जैसे खिलौना निष्प्रयोज्य हो फेंक दिया जाता।
मत हो अनजान, अब तो रुखसत के दिन आए। मत हो अनजान, अब तो रुखसत के दिन आए।
उसी एक सांस में मैंने फुसफुसाया, काश मैं सितारों को फिर लिख पाती। उसी एक सांस में मैंने फुसफुसाया, काश मैं सितारों को फिर लिख पाती।
कुछ पूरे कुछ अधूरे पर रहते हैं दिल के पास। कुछ पूरे कुछ अधूरे पर रहते हैं दिल के पास।
उफ्फ्फ... उम्र अब नहीं काफी, बस यही यादें हैं बाकी ! उफ्फ्फ... उम्र अब नहीं काफी, बस यही यादें हैं बाकी !
इस हड़बड़ी की वज़ह का है ? क्या खोया क्या पाया ? जब पता नहीं ? इस हड़बड़ी की वज़ह का है ? क्या खोया क्या पाया ? जब पता नहीं ?