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Baidehi Singh

Inspirational

4  

Baidehi Singh

Inspirational

छू लेने तो दो !

छू लेने तो दो !

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छू लेने दो तमन्नाओं को आसमान तक

दिन ,दिन न रहे रात के शय में न कोई बात बाकी


आंखों के कोर से झलकते एहसास को रोककर 

बाँध लो मुट्ठी में सारे सैलाब; धो दो निशान 

नित्य चुभन के


चलना ही है, रुकना नहीं

सोचना है थमना नहीं

वादों का मंजर साथ रहे, याद बस यही दिन- रात हो


छू लेने दो चिरागों को अंधेरे का आँगन 

चलने दो राहगुज़र को मंजिल की तरफ।


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