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Riddhi Gohil

Classics

3  

Riddhi Gohil

Classics

छोटी से बड़ी

छोटी से बड़ी

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छोटी सी चिड़िया

देखते-देखते               

हो गई बड़ी अब। 


आइ कुछ ऐसी उलझनें                   

हल जिसका उसे खुद लाना है। 

छो़ना हैं अब घर-आँगन 

बचपन का वह खेल                        

वह परिवार प्यार

और सालों पुरानी वह पहचान। 


अपने सपनों कि परवाह ना कर            

करने है सभी के सपने साकार। 

अपनी खुशी की परवाह न कर 

करना है सबको खुश। 


न रह सकती थी वो

जिनके बिना एक पल

उनके बिना रहने की

आदत डालनी है अब। 


अपनी से पंसद पहले                    

 किसी और की पंसद को

अपना बनाना है। 


अपनो को पराया और

परायों को अपने करना है। 

करना है वह घर-आँगन अपना

जिसे न पहले कभी था देखा। 


क्योंकि अब छोटी चिड़िया

बड़ी हो गई है। 


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