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Sumer Meghwal

Abstract

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Sumer Meghwal

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भूमिपुत्र की पुकार

भूमिपुत्र की पुकार

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अग़र देश का किसान दिल्ली तक आया है तो

उठो ‌! काफिरों, छोड़ो कुर्सी तुम्हारा अंत आया है 

तुम्हारे राजमहलों में भले ही गूंजे तुम्हारी जय जयकार

इस बार वतन की जय जयकार करने किसान आया है


अरे ! देश बेचने वालों

तुम अन्नदाता को गद्दार कहते हों

देश की हिफाज़त करने वालों को 

तुम हर बार नकार देते हों


इस बार सामना करना होगा

तुम्हारी अहंकारी सत्ता को

देश के जवानों से, देश के किसानो से

देश के युवाओं से, देश के बेरोजगारों से


बाप दिल्ली के दंगों में शहीद होता है

बेटा कश्मीर की वादियों में,

उनके आने के सपने अधूरे रह जाते हैं

अपनी बेटियों की शादियों में


अगर मनमानी की तुमने

तो किसान दिल्ली तक आएंगे

सच लिखा है कलम ने

तो गीत सरहद पार भी गाए जाएंगे।


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