Deepak Mandrawal
Abstract
अंधेरों से ताज छीना,
भारत मां के लालों ने,
भारत-मां का सिरमौर है,
नाम पड़ा ऋषि कश्यप से,
पहचान है, हिंदुत्व की,
लो ताज वापस आ गया,
भारत मां के लालों ने।
सवेरा
बाग
राष्ट्रवाद
सम्मान
सत्य
सर्वोपरि भारत
केदार
Shiva
शिव-2
शिव-1
नदी ने चुना आसान सा रास्ता पत्थरों को तोड़ने का हर लहर का कटाक्ष नदी ने चुना आसान सा रास्ता पत्थरों को तोड़ने का हर लहर का कटाक्ष
बच्चे, बूढ़े, जवान सभी रंग चुके हैं आज तकनीक के रंग में, चाह कर भी निकलना है मुश्किल ढल चुके हैं ... बच्चे, बूढ़े, जवान सभी रंग चुके हैं आज तकनीक के रंग में, चाह कर भी निकलना है ...
इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है। इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है।
बीमारी से लड़ता जीवन संग्राम बेरोजगार नौजवान।। बीमारी से लड़ता जीवन संग्राम बेरोजगार नौजवान।।
जिस से जो भी मिलता फूल या कांटे, सभी को प्यार से गले लगा लेता था वो। जिस से जो भी मिलता फूल या कांटे, सभी को प्यार से गले लगा लेता था वो।
एक अटल चट्टान की भांति टिका हुआ हूं, फिर भी लोग कहते है कि, समय बहुत बदला सा नजर आ एक अटल चट्टान की भांति टिका हुआ हूं, फिर भी लोग कहते है कि, समय बहुत बदल...
वो जिन्दगी भी क्या है? अगर जी भर के जीए नहीं वो जिन्दगी भी क्या है? अगर जी भर के जीए नहीं
पर कहाँ मोरी निंदीया मेरे नैना रातें जागी। पर कहाँ मोरी निंदीया मेरे नैना रातें जागी।
मित्रता की क्या पहचान इस बात से हूँ अभी तक अंजान। मित्रता की क्या पहचान इस बात से हूँ अभी तक अंजान।
एक दिन ये जमीं और आसमां सब अजनबी हो जाएंगे। एक दिन ये जमीं और आसमां सब अजनबी हो जाएंगे।
पत्र युग के बाद आया मोबाइल का ज़माना लंबी बात होना बंद हो गया था पत्र युग के बाद आया मोबाइल का ज़माना लंबी बात होना बंद हो गया था
एक आवाज आती अंतर से नहीं, कुछ बाकी है जो पाना है, थोड़ा और चल एक आवाज आती अंतर से नहीं, कुछ बाकी है जो पाना है, थोड़ा और चल
उस बेटी की चीखों को राजनीति के शोर ने ही दबाया था। उस बेटी की चीखों को राजनीति के शोर ने ही दबाया था।
अब तक समझा नही ए ज़िन्दगी, तुझे बस काटना है या जीना है. अब तक समझा नही ए ज़िन्दगी, तुझे बस काटना है या जीना है.
जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही ज़िन्दगी के गणित को समझ पाना जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही ज़िन्दगी के गणित को समझ पाना
गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्टी में मिल ही जाते हैं. गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्टी में मिल ही जाते हैं.
हम सबने मिलकर ठाना है अब अपने भारत को स्वच्छ बनाना है। हम सबने मिलकर ठाना है अब अपने भारत को स्वच्छ बनाना है।
आसान नहीं, लांघना चौखट संस्कारों की, तो पहले संस्कारों की, शुरू पाठशाला हो जाए, आसान नहीं, लांघना चौखट संस्कारों की, तो पहले संस्कारों की, शुरू पाठशा...
आज कहां कोई शिष्य गुरु के चरणों में शीश नवाता है आज कहां कोई शिष्य गुरु के चरणों में शीश नवाता है
जो पूछ बैठे मेरे प्रेम का साथी कहां गई मेरी हृदय वासी रे! जो पूछ बैठे मेरे प्रेम का साथी कहां गई मेरी हृदय वासी रे!