Arun S Jain
Comedy
किसी भीड़ में
अचानक हमें ताव में
आकर किसी ने कह दिया,
कि हम गधे हैं
हमने भी हंसकर
जवाब दे दिया।
आप सही है
इसलिए हम शायद
सब झुण्ड में खड़े हैं।
पता नहीं फिर...
पहेली
भाई होशियार च...
मुझे बुलाना चाहते हो तो झाड़ू पोछा करने के साथ बर्तन मांजना भी सीख जाओ। मुझे बुलाना चाहते हो तो झाड़ू पोछा करने के साथ बर्तन मांजना भी सीख जाओ।
फाइल में काम ना कर पाता अफसर से डांट खाता पति फाइल में काम ना कर पाता अफसर से डांट खाता पति
इंसानों की ऐसी हालत देख, लाल टमाटर हंँस-हंँसकर इतराए। इंसानों की ऐसी हालत देख, लाल टमाटर हंँस-हंँसकर इतराए।
ये बहुत लिखता है हमारे बारे में, उसे सबक सिखाते हैं,। ये बहुत लिखता है हमारे बारे में, उसे सबक सिखाते हैं,।
कान लगा कर ध्यान से सुनना ज़रा इस मायावी दुनिया की बड़ी समस्या। कान लगा कर ध्यान से सुनना ज़रा इस मायावी दुनिया की बड़ी समस्या।
तब उसका रूप तो देखा ही दूजा। वह खाली नहीं थी भरी बैठी थी। तब उसका रूप तो देखा ही दूजा। वह खाली नहीं थी भरी बैठी थी।
लगा जिंदगी की पहली कमाई को सही काम में लगाया। लगा जिंदगी की पहली कमाई को सही काम में लगाया।
लाइट गुल थी सब तरफ अंधेरे का था राज रक्त जम रहा था डर से ,धड़कनें भी थी नासाज़ लाइट गुल थी सब तरफ अंधेरे का था राज रक्त जम रहा था डर से ,धड़कनें भी थी नासा...
अब उसकी मर्जी, मैं तो एक मामुली मानव हूं।। अब उसकी मर्जी, मैं तो एक मामुली मानव हूं।।
इनकम टैक्स वह रहें चुकाते और भले भाड़ में वो जाएं। इनकम टैक्स वह रहें चुकाते और भले भाड़ में वो जाएं।
प्रत्यावर्तन संभव हो पाएगा...? ये निस्संदेह गौर करने वाली बात है। प्रत्यावर्तन संभव हो पाएगा...? ये निस्संदेह गौर करने वाली बात है।
उन्होंने भी दिखा दिया, अगर तरीका न बदला तो बरसात न मिलेगी दोबारा। उन्होंने भी दिखा दिया, अगर तरीका न बदला तो बरसात न मिलेगी दोबारा।
नई-नई उलझनें पैदा कर रही हैं, जिनसे निपटना नामुमकिन-सा लगता है। नई-नई उलझनें पैदा कर रही हैं, जिनसे निपटना नामुमकिन-सा लगता है।
तो बिन पिए इस मौसम में, कैसे रहेंगे जिंदा यार। तो बिन पिए इस मौसम में, कैसे रहेंगे जिंदा यार।
पिज्जा पास्ता जंक फूड ब्रेक में खाती, मम्मी करती क्लास, मैं पार्टी में जाती। पिज्जा पास्ता जंक फूड ब्रेक में खाती, मम्मी करती क्लास, मैं पार्टी में जाती।
लिख मैं भी एक किताब दूँ, चाँद सा ये मुखड़ा तेरा इजाजत हो तो निहार लूँ ? लिख मैं भी एक किताब दूँ, चाँद सा ये मुखड़ा तेरा इजाजत हो तो निहार लूँ ?
मेरी घरवाली बात सच्ची बताती है, आँखों ही आँखों में मुझको डराती है।। मेरी घरवाली बात सच्ची बताती है, आँखों ही आँखों में मुझको डराती है।।
अभी अभी तो चंद्रयान पहुँचा ही है और आपके मुंह में भी पानी आने लगा। अभी अभी तो चंद्रयान पहुँचा ही है और आपके मुंह में भी पानी आने लगा।
रेल यात्रा का मजा ही कुछ और होता था, खास कर जब कोयला इंजन हुआ करता था। रेल यात्रा का मजा ही कुछ और होता था, खास कर जब कोयला इंजन हुआ करता था।
जो जिंदगी के सफर में दे जाएंगी मधुर यादें। जो जिंदगी के सफर में दे जाएंगी मधुर यादें।