Arun S Jain
Comedy
किसी भीड़ में
अचानक हमें ताव में
आकर किसी ने कह दिया,
कि हम गधे हैं
हमने भी हंसकर
जवाब दे दिया।
आप सही है
इसलिए हम शायद
सब झुण्ड में खड़े हैं।
पता नहीं फिर...
पहेली
भाई होशियार च...
भारतीय लोकतंत्र को समर्पित एक भावान्जलि भारतीय लोकतंत्र को समर्पित एक भावान्जलि
रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाये/ चीखे रचनात्मक आन्दोलन चलानेवाले कविगण चिल्लाय...
हर दिन हमारी आँखों के सामने, हमारे आसपास इंसानियत का कत्ल होता है और हम कुछ करना तो दूर कुछ कहते भी ... हर दिन हमारी आँखों के सामने, हमारे आसपास इंसानियत का कत्ल होता है और हम कुछ करना...
न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग न यह शिवशंभु का चिट्ठा न परसाई जी का व्यंग
एक पहुंचे हुए संत प्रवचन सुना रहे थे "अज्ञानी" जनता को "मोक्ष" सिखला रहे थे। एक पहुंचे हुए संत प्रवचन सुना रहे थे "अज्ञानी" जनता को "मोक्ष" सिखला रहे थे...
जनवासे में शोर मच गया दूल्हे के दूर का फूफा रूठ गया। जनवासे में शोर मच गया दूल्हे के दूर का फूफा रूठ गया।
कहते कहते बाबूजी रोने लगे हमारे नेत्र भी सजल होने लगे। कहते कहते बाबूजी रोने लगे हमारे नेत्र भी सजल होने लगे।
चाहते हो शान्ति सुख व निरोग काया योग सभी को कर बांए। चाहते हो शान्ति सुख व निरोग काया योग सभी को कर बांए।
मैं एक मर्द हूँ और मैं माफ़ी चाहता हूँ सीता से राम की ग़लती के लिए उन्होंने सबकुछ जानते हुए भी तु... मैं एक मर्द हूँ और मैं माफ़ी चाहता हूँ सीता से राम की ग़लती के लिए उन्होंने सब...
पर छली जाती हर पापी से बारम्बार। वेदना इसकी कोई न जाने, करते सब इसका ही संहार। पर छली जाती हर पापी से बारम्बार। वेदना इसकी कोई न जाने, करते सब इसका ही संहार...
ऊपर से जाने कहांँ से मिल गया उसे वरदान में सुपर पावर। ऊपर से जाने कहांँ से मिल गया उसे वरदान में सुपर पावर।
मज़ाक और रसमलाई दोनों का हिसाब बराबर चुकाया। मज़ाक और रसमलाई दोनों का हिसाब बराबर चुकाया।
अब आप ही बताइए इसमें मेरा क्या है दोष। अब आप ही बताइए इसमें मेरा क्या है दोष।
आजकल सांसें ठीक से ले रहे हो ना, जिंदा तो हो ना वो क्या है ना तुम कहते थे सांसों से ज्यादा जरूरत ... आजकल सांसें ठीक से ले रहे हो ना, जिंदा तो हो ना वो क्या है ना तुम कहते थे सां...
हुआ ऐसा 4,5 मकान छोड़ के सामने वाले घर में मैंने देखा किसी को लंबे बाल आगे लेकर पोंछते हुआ ऐसा 4,5 मकान छोड़ के सामने वाले घर में मैंने देखा किसी को लंबे बाल आगे लेकर ...
हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं. हुस्न का दीदार होते ही हमारी कमबख्त आंखें दगा दे जाती हैं.
बादल को प्रतीक बनाकर वर्तमान परिवेश पर चोट करता एक गीत बादल को प्रतीक बनाकर वर्तमान परिवेश पर चोट करता एक गीत
हाइकु और दोहा, राह में टकरा गए, एक दूजे को घूरा। हाइकु और दोहा, राह में टकरा गए, एक दूजे को घूरा।
निष्ठुर भाव से उन्होंने मना कर दिया फिर मैंने इस तरह आने का कारण पूछा निष्ठुर भाव से उन्होंने मना कर दिया फिर मैंने इस तरह आने का कारण पूछा
साँच को आंच नहीं आती, और झूठ के पांव नहीं होते। साँच को आंच नहीं आती, और झूठ के पांव नहीं होते।