STORYMIRROR

Priyanka Gupta

Abstract

4  

Priyanka Gupta

Abstract

बेटी से बहू बन गई

बेटी से बहू बन गई

1 min
473

देखो ना एक रात में ज़िंदगी कितनी बदल गई,

कल जो बेटी थी ! किसी की, आज बहू बन गई,


जो दूसरो के कंधे पर जिम्मेदारियों की तरह थीं,

आज खुद के कंधो पर जिम्मेदारिया पड़ गई,


देखो ना एक रात में ज़िंदगी कितनी बदल गई,

अकेले कहां कटने वाला था ये सफ़र,


इसलिए थाम हाथ किसी का , लो! वो चल पड़ी,

बचपने को पीहर में छोड़, द्हलीज ससुराल का लांघ गई,


देखो ना एक रात में ज़िंदगी कितनी बदल गई,

कल जो बेटी थी ! किसी की, आज बहू बन गई।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract