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Kanchan Moudgil

Abstract

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Kanchan Moudgil

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बचपन

बचपन

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वो बचपन में

नानी के घर जाना

देर तक जागना और

हर फरमाईश पूरी करवाना

आज भी याद है।


लिपटकर यूँ माँ से सो जाना

सुबह से शाम तक की

आपबीती सुनाना

अगर कुछ छुपाऊँ तो मेरी

आंखों में देख पढ़ जाना

आज भी याद है।


नाना का यूँ माथा चूमना

रोज़ शाम आईसक्रीम लाना

सटेशन पे छोड़ने जाना

और कस के गले लगाना

आज भी याद है।


बचपन था जो बीत गया है

लौटकर नहीं अब वो आएगा

खुद को हर बार ये समझाना

आज भी याद है।


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