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CHANDRA BHUSHAN

Abstract

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CHANDRA BHUSHAN

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बचपन और पचपन

बचपन और पचपन

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उँगली पकड़ चलना सिखलाया बचपन।

उठ चलने का अभ्यास कराया बचपन।


आज राह बताये, संस्कार सिखलाये।

मुस्कुराये बचपन बड़ा सताये पचपन।


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