CHANDRA BHUSHAN
Abstract
उँगली पकड़ चलना सिखलाया बचपन।
उठ चलने का अभ्यास कराया बचपन।
आज राह बताये, संस्कार सिखलाये।
मुस्कुराये बचपन बड़ा सताये पचपन।
गाँव
चिराग
बचपन और पचपन
महफिल में बड़े गुनगुनाते थे दिल पर मेरे छुरियाँ बड़ी चलाते थे महफिल में बड़े गुनगुनाते थे दिल पर मेरे छुरियाँ बड़ी चलाते थे
यह संभलते नहीं कर लो जितनी कोशिश यह फिर जुड़ते नहीं। यह संभलते नहीं कर लो जितनी कोशिश यह फिर जुड़ते नहीं।
जब सारी भावनायें भरी है केवल तीन शब्दों में फिर आदमी परेशान क्यों है ! जब सारी भावनायें भरी है केवल तीन शब्दों में फिर आदमी परेशान क्यों है !
पराए तो पराए ठहरे उनसे क्या गिला कोई अपना भी दिल दुखाता है क्या पराए तो पराए ठहरे उनसे क्या गिला कोई अपना भी दिल दुखाता है क्या
आओ आओ अवधपुर राम जी हम कब से निहारें तोरी राह जी। आओ आओ अवधपुर राम जी हम कब से निहारें तोरी राह जी।
कोयल की कूक, चिड़ियों की चहक से जीवन में संचार समाई कोयल की कूक, चिड़ियों की चहक से जीवन में संचार समाई
हो-ना हो-ना कोविड कोविड , तेरी राहेे कहां कहां। हो-ना हो-ना कोविड कोविड , तेरी राहेे कहां कहां।
शहरों में होती चहल-पहल पर देस में जाता है वक़्त ठहर हाँ याद है हमें वो कच्ची मिट्टी के घरों के पनाहो... शहरों में होती चहल-पहल पर देस में जाता है वक़्त ठहर हाँ याद है हमें वो कच्ची मिट...
लॉकडाउन में बढ़ाओ इम्युनिटी खाओ खाना वो रक्खे जो हेल्दी एक्सरसाइज करो रेगुलरली लॉकडाउन में बढ़ाओ इम्युनिटी खाओ खाना वो रक्खे जो हेल्दी एक्सरसाइज करो रेगुल...
चलती राह से गुफ्तगु किए करूं सफ़र ये मुक्कमल। चलती राह से गुफ्तगु किए करूं सफ़र ये मुक्कमल।
पिता के प्यार से बढ़कर नहीं दौलत जमाने में.... पिता के प्यार से बढ़कर नहीं दौलत जमाने में....
तुम्हारे दिन ढलते और तुम्हें रंग बदलते तुम्हारे दिन ढलते और तुम्हें रंग बदलते
जिंदगी की हर राहों पे क़म खुशियां ग़म ज़्यादा हैं! जिंदगी की हर राहों पे क़म खुशियां ग़म ज़्यादा हैं!
कर लो जितनी कोशिश यह फिर जुड़ते नहीं। कर लो जितनी कोशिश यह फिर जुड़ते नहीं।
जहाँ भोर सुनहरी होती है और शाम सिंदूरी होती है। जहाँ भोर सुनहरी होती है और शाम सिंदूरी होती है।
वक्त फिसलता जा रहा है, हर धड़कन के साथ वक्त फिसलता जा रहा है, हर धड़कन के साथ
हर साल आते हो तुम रूप बदल बदल के, आए हो मेरे देश में तुम तो त्यौहार बन के हर साल आते हो तुम रूप बदल बदल के, आए हो मेरे देश में तुम तो त्यौहार बन के
दिल तो बच्चा है जी, थोड़ा कच्चा है जी। दिल तो बच्चा है जी, थोड़ा कच्चा है जी।
छलकती है गगरी अधजल जब हो भरी न समझ तू ईश है मेरी समझ तू विष है! छलकती है गगरी अधजल जब हो भरी न समझ तू ईश है मेरी समझ तू विष है!
कब तक यूं तड़पाएगी रातों की नींद उड़ाएगी कब तक यूं तड़पाएगी रातों की नींद उड़ाएगी