बादलों के संग
बादलों के संग
अश्वेत है वो बादलों का रंग
जिसको छूकर उड़ते थे हम मस्त मगन
कागज़ों के नाव भी देखे वो दंग
क्यूंकि आज वो भी उड़े उन बादलों के संग
तितली भी सोचे कैसे बदलूं मैं ये रंग
सोचते रहे इश्क में होके वो तंग
हैरानी है बस उस हवाओं की वो उमंग
चहकती हुई बोली वो कोयलों के संग
उड़ते हुए सब बह गए समुंद्र के तरंग
मछलियों ने भी कहा उड़ना है उनके संग
लहरों को भी आसमान छूने की ये उमंग
बार - बार कहे क्यूं ना उड़ जाएं हम इन बादलों के संग।।
