ॐ कार
ॐ कार
सत्य का शाश्वत सृजन ओंकार हूं मैं
सृष्टि मेरी जिस का पालनहार हूं मैं
जब लगे बोझिल ऋचाओ के सभी स्वर
और गुंजित हो स्वयम् बस ओम् नश्वर
प्रक्रिया वीणा जनित झंकार हूं मै
सत्य का शाश्वत सृजन ओंकार हूं मैं
सृष्टि मेरी जिसका पालनहार हूं मैं
सबको होता हर दिशा में मेरा दर्शन
और सुधिया कर रही हैं दिव्य नर्तन
जीवन मरण के चक्र से उद्धार हूं मैं
सत्य का शाश्वत सृजन ओंकार हूं मैं
सृष्टि मेरी जिसका पालनहार हूं मैं
सब नक्षत्रों में ग्रहों में व्याप्त मैं ही
जीवों का आनंद हूं संताप मैं ही
देह धारे मनुज हूँ अवतार हूं मैं
सत्य का शाश्वत सृजन ओंकारहूं मैं
सृष्टि मेरी जिसका पालनहार हूं मैं।
