STORYMIRROR

Vivek Sharma

Abstract

3  

Vivek Sharma

Abstract

अपनों से हार जाने का फितूर है

अपनों से हार जाने का फितूर है

1 min
53

'वक्त की बिसात पर अब खेल थोड़ा अजीब है,

शह और मात का मामला भी काफी करीब है।'

अपनों से ही हार जाने का, चढ़ा ना जाने क्यों फितूर है,

'वक्त से 'विवेक' को यहां भी नसीहत लेने का जुनून है ।।'

                                                       विवेक शर्मा


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract