सुरशक्ति गुप्ता
Abstract
नहीं हूँ मैं कोई शिल्पकार
पर अपनी अक्षरजननी से
बड़े-बड़े दिलों को आजमाया है मैंने...
आत्मीय कंपन
प्यार
प्रेम संदेश
नवरात्रै
रंगोत्सव
श्रीराम
विश्व हिंदी द...
एकान्तता
सर्वश्रेष्ठ उ...
टूटेगा ना धागा फ़िर से, कवि मन मेरा जागा फ़िर से। टूटेगा ना धागा फ़िर से, कवि मन मेरा जागा फ़िर से।
जो सब कुछ त्याग कर नर्स बन जाती हो तुम ! जो सब कुछ त्याग कर नर्स बन जाती हो तुम !
जब तक न लिखूँ कोई कविता, दिवस अधूरा मन रूठ रहा है। जब तक न लिखूँ कोई कविता, दिवस अधूरा मन रूठ रहा है।
क्यों आग लगी है सीने में क्यों दर्द उठा है सीने में! क्यों आग लगी है सीने में क्यों दर्द उठा है सीने में!
वो स्याही जो कोरे पन्नों पर, शब्दों की लता उस कागज में लपटी हैं । वो स्याही जो कोरे पन्नों पर, शब्दों की लता उस कागज में लपटी हैं ।
जिसे पाने की चाहत है बड़ी क़ाबिल है वो लड़की। जिसे पाने की चाहत है बड़ी क़ाबिल है वो लड़की।
नवदुर्गा के ,माना गया ,होते हैं नौ रूप। होते हैं नौ भोग भी, जैसे अलग स्वरूप।।१।। नवदुर्गा के ,माना गया ,होते हैं नौ रूप। होते हैं नौ भोग भी, जैसे अलग स्वरूप।।...
प्रेम वह है जो खुशी का संचार कर देता है! प्रेम वह है जो खुशी का संचार कर देता है!
हमने भी कुछ सपने, बुन कर रखे थे मिट्टी के संग । हमने भी कुछ सपने, बुन कर रखे थे मिट्टी के संग ।
निज कर्त्तव्यों को विस्मृत कर स्मृत रखते हैं केवल अधिकार। निज कर्त्तव्यों को विस्मृत कर स्मृत रखते हैं केवल अधिकार।
धिक्कार है, बीते लम्हे को मैं हर पल कोसा करता था! धिक्कार है, बीते लम्हे को मैं हर पल कोसा करता था!
जीत की भूख, हिंसक बना देती है! जीत की भूख, हिंसक बना देती है!
जहां प्रेम ही इतिहास है, क्यों लहू ये गिरता यहां, जहां प्रेम ही इतिहास है, क्यों लहू ये गिरता यहां,
बीहड़ों की हूँ रानी,मैं, हर युग की हूँ कहानी,मैं! बीहड़ों की हूँ रानी,मैं, हर युग की हूँ कहानी,मैं!
लम्हें जिंदगी के, कुछ खट्टे कुछ मीठे, ज़हन में बस जाते हैं! लम्हें जिंदगी के, कुछ खट्टे कुछ मीठे, ज़हन में बस जाते हैं!
कुदरत का अजब करिश्मा है, क्या ब्रह्म मुहूर्त और, पारिजात का कोई रिश्ता है? कुदरत का अजब करिश्मा है, क्या ब्रह्म मुहूर्त और, पारिजात का कोई रिश्ता है?
ज्यों ही पलटा उसके पन्नों को मैंने, मिली मुझे उनमें रातें भी कई ज्यों ही पलटा उसके पन्नों को मैंने, मिली मुझे उनमें रातें भी कई
नहीं वो तो अपने घूँघट में ही छुपकर रह गयी। नहीं वो तो अपने घूँघट में ही छुपकर रह गयी।
देख लेता हूँ मैं जीवन का सब कुछ उसकी गली से गुजरते हुये। देख लेता हूँ मैं जीवन का सब कुछ उसकी गली से गुजरते हुये।
तो फिर काट दो हाथ मेरे, जोड़ दो हल में किसी ताकि वे पकड़ लें हाथ खेत जोतने वाले के। तो फिर काट दो हाथ मेरे, जोड़ दो हल में किसी ताकि वे पकड़ लें हाथ खेत जोतने वाले...