Rajendra Singh
Comedy
अपना लगा पराया, अब सलाम किस बात की।
बंधी मुठ्ठी लाख की तो खुले मुठ्ठी खाक की।।
यह तो बताओ बंधा रहना चाहते हो या खुला,
बंधे रहने में ही कद्र है बात की।
दिलवर्
मुफ्लिसी
फैक्ट
पैसा...... पै...
दोस्त ---यार
अपना --- परा...
इतिहास की परीक्षा थी उस दिन, चिंता में दिल धड़कता था। इतिहास की परीक्षा थी उस दिन, चिंता में दिल धड़कता था।
कौन है अच्छा, कौन बुरा है, दोनों की अपनी खूबी। कौन है अच्छा, कौन बुरा है, दोनों की अपनी खूबी।
एक दिन हम चुपके से, पड़ोसन के घर जा पहुँचे। एक दिन हम चुपके से, पड़ोसन के घर जा पहुँचे।
क्या है?? अब क्यों गुर्राए? तुम कब सलीका सीखोगी? क्या है?? अब क्यों गुर्राए? तुम कब सलीका सीखोगी?
चालें चलता हर कोई, देने को शह मात जीवन में चलते रहते हैं घात और प्रतिघात। चालें चलता हर कोई, देने को शह मात जीवन में चलते रहते हैं घात और प्रतिघात।
बगुले की तरह सारा ध्यान "माल" हड़पने में रहता है बगुले की तरह सारा ध्यान "माल" हड़पने में रहता है
ठंडी क्या आफत है भाई, सर पे टोपी बदन रजाई। ठंडी क्या आफत है भाई, सर पे टोपी बदन रजाई।
आज के बच्चों के नये-नये शौक नए फसाने हैं तरह-तरह के मोबाइल हाथ में। आज के बच्चों के नये-नये शौक नए फसाने हैं तरह-तरह के मोबाइल हाथ में।
इससे ज्यादा मुहब्बत भी ठीक नहीं है यारों जोश में ये एसिडिटी के दलदल में धंसा जाती है इससे ज्यादा मुहब्बत भी ठीक नहीं है यारों जोश में ये एसिडिटी के दलदल में धंसा...
मोटी मोटी काली काली जुओं को सिर में पाला। मोटी मोटी काली काली जुओं को सिर में पाला।
बर्फ की बारिश का नजारा बड़ा प्यारा है। बर्फ की बारिश का नजारा बड़ा प्यारा है।
एक रोज़ सोचा यूं कि हाले बयां कर दूं। एक रोज़ सोचा यूं कि हाले बयां कर दूं।
ये कवि की खिचड़ी है अधपकी,अधकचरी भी रह सकती है। ये कवि की खिचड़ी है अधपकी,अधकचरी भी रह सकती है।
बहुत दिनों से सोच रहा हूं मैं भी एक राजनीतिक पार्टी बना लूं। बहुत दिनों से सोच रहा हूं मैं भी एक राजनीतिक पार्टी बना लूं।
अपने भ्रष्टाचार की सारी तोहमत तेरे सिर मढ़ दूंगा अपने भ्रष्टाचार की सारी तोहमत तेरे सिर मढ़ दूंगा
तब से हुई बंदूकें रिटायर, दरोगा न बंदूक चलाएं, तब से हुई बंदूकें रिटायर, दरोगा न बंदूक चलाएं,
अमेज़न, मीशो आजकल नई आ गयी है मजबूरी सेल के दिनों में तो काफी सम्हल कर रहना जरूरी अमेज़न, मीशो आजकल नई आ गयी है मजबूरी सेल के दिनों में तो काफी सम्हल कर र...
एक साहेब , थे भुलक्कड़ हमेशा कुछ ना कुछ भूलते रहते थे। एक साहेब , थे भुलक्कड़ हमेशा कुछ ना कुछ भूलते रहते थे।
अधिवक्ता कहते हैं हमको श्रीमान, और मुक़दमा लड़ना हमारा काम है। अधिवक्ता कहते हैं हमको श्रीमान, और मुक़दमा लड़ना हमारा काम है।
नेता जी से कुछ परिचय हुआ उन्हें मेरा कहना भी भाया नेता जी से कुछ परिचय हुआ उन्हें मेरा कहना भी भाया