"अपेक्षाओं से आज़ादी"
"अपेक्षाओं से आज़ादी"
मैं खुश रहती हूँ हर पल,
क्योंकि किसी से उम्मीद नहीं रखती,
समझ आया जब जीवन ने सिखाया,
दुनिया हमारी सोच से नहीं चलती।
कभी दोस्तों से उम्मीद थी,
पर वे राहें बदल गए,
कुछ रिश्तों से आस लगाई,
पर रिश्ते भी हाथ से निकल गए।
अपनों से उम्मीद रखी थी,
पर वे भी पराए हो गए,
दूसरों का अकेलापन बाँटना चाहा,
पर खुद अकेली हो गए।
भरोसा करने से डरने लगी,
अंधेरे को ही अपना बना लिया,
जब खुद को टटोला भीतर,
तो खुशी का दीपक जलाया।
सीखा जीवन का असली सुख,
अपेक्षाओं से मुक्त हो जाने में है,
दूसरों के लिए जीते रहे सदा,
पर जीवन खुद के लिए जीने में है।
प्यार करो दिल खोलकर,
पर जबरदस्ती किसी रिश्ते में मत बंधो,
सीखो जीवन की हर सीख,
खर्च करो, पर पहले कमाओ।
दुख देने से पहले महसूस करो,
हार से पहले कोशिश करो,
नफरत से पहले प्यार करो,
मरने से पहले जी लो!
कोई तुम्हारी उम्मीदों पर खरा न उतरे,
तो खुद से भरोसा मत खोना,
जो दुख देना सीख गए हैं,
उनसे सीखकर खुद को संवारना।
हर दिन जियो अपने लिए,
अपने सपनों को पूरा करो,
क्योंकि यह जीवन तुम्हारा है,
और सपने भी सिर्फ तुम्हारे हैं!
