STORYMIRROR

Seema Rahasyamai

Abstract

3  

Seema Rahasyamai

Abstract

तपन

तपन

1 min
179

जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।

जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।

जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।

जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।

जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।

जिसमें इन्सान कभी इधर तो कभी उधर है

इधर तो ज्वालामुखी सी उसके प्यार की तपन है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract