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Akhtar Ali Shah

Inspirational

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Akhtar Ali Shah

Inspirational

अबार्शन

अबार्शन

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भ्रूण हत्या पाप है लोगों,

मत पापों को पनपाओ।

जो भी आए उसे गर्भ में,

सहजभाव से अपनाओं।


लड़की अगर गर्भ में आती,

नहीं किसी का कुछ लेती।

घर की रौनक बनकर के वो,

खुशियां ही हर पल देती।


अपनी किस्मत का खाती वो,

घर के काम किया करती।

झाड़ू पोंचा चौका बर्तन,

मटकी पानी की भरती।

लड़की को मत कोसो लोगों,

हरदम उसके गुण गाओ।

जो भी आया उसे गर्भ में,

सहज भाव से अपनाओ।

 

गर्भ गिरा दो सोच दूषित है,

इसका लाभ उठा कर के।

घर भरते हैं डॉक्टर अपना,

लोगों डरा डरा कर के। 


लड़के को भी लड़की कहकर,

सुख में आग लगाते हैं।

झोंक गर्त में बर्बादी के,

दुश्मन मौज उडाते हैं।


है वरदान ईश का बच्चे,

सुख संपति घर घर लाओ।

जो भी आये उसे गर्भ में,

सहज भाव से अपनाओ।


बेटा हो या बेटी कोई,

सबके दिल में पीर पले।

नस्ल,नही बेटा होने पर,

क्या बेटी से नहीं चले।


कोई भी हो काबिल करदो,

बोझ यकींनन बांटेगा।

"अनन्त"गम की पड़ी बेड़ियां,

होंगी तो वो काटेगा।


खुली लाटरी को मत लोगों,

बंद आँग कर ठुकराओ।

जो भी आये उसे गर्भ में,

सहज भाव से अपनाओ।


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