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Shikha shivangee

Abstract

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Shikha shivangee

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आज़ाद होने दो....

आज़ाद होने दो....

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सूखे गुलाब को नदामत ना होने दो

आरिज़ पे नमकीन सावन को आने दो

खुद को एक दफा आज़ाद होने दो।। 


तूफ़ां को भीतर महदूद ना होने दो

बेजान यादों की पिंजर को आशियां ना होने दो

खुद को एक दफा आज़ाद होने दो।। 


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