Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Priti Raghav Chauhan

Abstract


3  

Priti Raghav Chauhan

Abstract


आभार बन मैं हवाओं में था

आभार बन मैं हवाओं में था

1 min 428 1 min 428

आभार बन मैं 

हवाओं में था

अनहद नाद सुना

तो होगा सरे सांझ..?? 

परिंदों के परों में

मंजीरे के स्वरों में

गोधूलि की हलचल में

नदियों की कलकल में

बच्चों के जोश में 

बड़ों की जयघोष में 

आभार बन मैं 

हवाओं में था 

अनहद नाद सुना तो 

होगा सरे सांझ...! 



Rate this content
Log in

More hindi poem from Priti Raghav Chauhan

Similar hindi poem from Abstract