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परीक्षा
परीक्षा
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© Ajay Amitabh Suman

Inspirational

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इस तरह की घटनाएँ इतिहास में बहुत ही कम घटी है जब किसी शिष्य ने अपने गुरु की परीक्षा ली। वो शिष्य अगर विवेकानंद हो तो परीक्षा की बात ही कुछ और होगी।यह घटना श्री रामकृष्ण परमहंस जी के जीवन के बारे में है।

श्री रामकृष्ण परमहंस जी हमेशा कहा करते थे कि एक पुरुष को कंचन कानन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अर्थात एक पुरुष के आध्यात्मिक विकास में और पैसे का लालच बाधा बनता है। इसलिए एक पुरुष को हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए कि उसका आकर्षण स्त्री और पैसे के प्रति कम से कम रहे। ऐसा कहा जाता है कि श्री रामकृष्ण परमहंस कभी भी पैसे को छूते नहीं थे।

विवेकानंद जी श्री रामकृष्ण परमहंस की परीक्षा लेना चाहते थे। श्री रामकृष्ण परमहंस जी हमेशा एक जगह बैठकर अपने शिष्यों को उपदेश दिया करते थे। एक बार विवेकानंद जी, श्री रामकृष्ण परमहंस जी के जाने से पहले ही उनके स्थान पर पहुंच गए और जहां पे श्री रामकृष्ण परमहंस जी बैठने वाले थे, वहाँ पर कपड़ों के नीचे कुछ पैसे रख दिए। फिर वह श्री रामकृष्ण परमहंस जी का इंतजार करने लगे।

थोड़ी देर बाद श्री रामकृष्ण परमहंस जी आए और ज्योही अपनी जगह पर बैठे, वह अचानक से उछल पड़े। श्री रामकृष्ण परमहंस जी चिल्लाकर बोलने लगे कि यहाँ पे कुछ गर्म वस्तु रखी हुई है। उनके शिष्यों ने जब देखा तो उनके कपड़ों के नीचे, जहां वो बैठने वाले थे, वहां पर कुछ पैसे रखे हुए थे। दरअसल श्री रामकृष्ण परमहंस जी को उन्हीं पैसों के कारण परेशानी हो रही थी और उसी के कारण वह उछल कर खड़े हो गए थे।

इस तरह से जो श्री रामकृष्ण परमहंस जी अपने शिष्यों को उपदेश दिया करते थे और पैसे कभी भी अपने हाथ में नहीं लेते थे, उनका यह उपदेश उनके अवचेतन मन मे जा बैठा था। उस दिन जब पैसे उनके बैठने के स्थान पर विवेकानंद द्वारा कपड़ों के नीचे छुपा कर रख दिये थे तो वह एकदम से उछल पड़े थे। दरअसल सिक्के ही उन्हें किसी गर्म वस्तु के समान लग रहे थे। इस तरह विवेकानंद द्वारा श्री रामकृष्ण परमहंस जी की परीक्षा में श्री राम कृष्ण परमहंस जी उत्तीर्ण हुए।

उपदेश पैसे शिष्य

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