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कमज़ोरियों में ख़ूबियों को ढूँढो-- कुमार
कमज़ोरियों में ख़ूबियों को ढूँढो-- कुमार
★★★★★

© Jai Kumar

Inspirational

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शीर्षक:- कमज़ोरियों में ख़ूबियों को ढूँढो

दरया नाम का एक बहुत ही ख़ूबसूरत राज्य था| पर इस  राज्य का राजा बहुत ही निर्दयी और क्रूर था| वह अपनी प्रजा पर पत्थर से लेकर मिट्टी हर वस्तु की ख़रीद पर मनचाहा कर वसुल करता था| प्रजा मज़बूर थी पर कुछ कर नहीं सकती थी| राज़ा निर्दयी और क्रूर के साथ-साथ कला प्रेमी भी था| एक युद्ध में वह अपनी टाँगें खो चुका था पर उसके खिलाफ़ किसी की हिम्मत नहीं दूसरा राजा चुनने की| राजा  कला को अपने पूरे राज्य में फैलाना चाहता था| वह दूर प्रदेश से अलग- अलग कला में माहिर लोगों को अपने देश में न्योता देता और उनसे अपने राज्य की ख़ूबसूरती के लिऐ अपने हुनर को दिखाने को कहता| राजा को जब उनकी कला पसंद नहीं आती तो राजा उनको कठोर दण्ड देता | इस तरह यह बात फैलती गई और कलाकारों ने दरया में जाना छोड़ दिया | यह बात राजा को और क्रोधित करने लगी पर राजा ने अपने रवइऐ में कोई बदलाव ना किया| एक दिन हुसैन अऩवर नाम का चित्रकार गाँव-गाँव, शहर- शहर घूम कर दरया पहुँचा| वह अपनी कला से लोगों के दिलों पर राज करने लगा| उसकी ख़्याति दिन-ब-दिन बढ़ने लगी| एक दिन राजा को उसके बारे में पता चला और राजा ने उसे अपने दरबार में बुलाया| हुसैन अऩवर राजा के महल गया | राजा ने उससे कहा की वह उसकी चित्रकारी देखना चाहता है|  हुसैन अऩवर बहुत ख़ुश था पर साथ-साथ डरा भी हुआ था क्योंकि वह राजा की क्रूरता के बारे में गाँव वालों से सुन चुका था| राजा ने उससे कहा वह राजा की एक त़स्वीर बनाऐ| सब़ बहुत डर गऐ क्योंकि सब़ जानते थे कि अग़र हुसैन अऩवर ने राजा को चित्र में अपाहिज दिखाया तो राजा उसे मृत्यु दण्ड देगा| जब हुसैन अऩवर ने राजा की तस्वीर राजा को दिखाई तो केवल राजा ही नहीं सभी मंत्री भी उसकी कला और उसके दिमाग़ की सोच की वाह-वाह करने लगे| उसने चित्र में बनाया था की राजा अपने दोनों पैर मोड़कर मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहा है| इस तरह उस चित्रकार ने राजा की कमियों को दरकिनार कर उसके इंसान वाले अक़्स को अपनी कला से उबारा| राजा ने उस चित्रकार इनाम में हीरे-जवाहरात दिऐ और उसे अपने राज्य के मंत्रिमण्डल में श़ामिल कर लिया और उसके बाद राजा ने किसी भी कलाकार का अपमान नहीं किया और ना ही किसी को दण्डित किया|

 

 

 

 

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