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Shimla Pandey

Inspirational

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Shimla Pandey

Inspirational

जिन्दगी पर असर

जिन्दगी पर असर

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उम्र सारी गुजारी कैसे,पता ही नहीं।

वो बचपन की कुछ झलकें याद आती हैं

वो आँगन की मिट्टी की खुसबू मन को लुभा जाती है।


त्योहारों पर मिट्टी के खिलौनो की याद आती है

पिता का प्यार भरा हाथ माँ की मुस्कान भरी लोरी।

भाई का झगड़ना बहनों की हमजोली

दरवाजे की नीम के पेंड़ का झूला

अटारियों पर मोर का नाचना

गाँव के स्कूल जाना,मिट्टी का बुदक्का घुली हुयी खड़िया।


हाथ में लकड़ी की पट्टी काले रंग से पुती हुयी।

कैसे सब बीत गया, पता ही नहीं

उम्र के हर पड़ाव में,हजारों लोग मिले।

चलते चलते इस पड़ाव पर कब आये, पता ही नहीं

आँखो की रोशनी ने तो कभी साथ न छोड़ा था मेरा।


कब से धुंधला सा दिखाई देने लगा,पता ही नहीं

देखा जब आइना बालों में चमक देखी नहीं।

कब से बालों में सफेदी आई हमको, यह पता ही नहीं

अपने देश भारत से अमेरिका तक का सफर हमने किया।


पैर ये कबसे थम थम के चलने लगे, पता ही नहीं

जिन्दगी में जो सहारा बना था औरों का।

खुद को कब से सहारे की जरूरत पड़ी, पता ही नहीं

गीतों को गाते गुजारी है जिन्दगी की डगर।


सुर कबसे वेसुर हुये, हमको यह पता ही नहीं

ख्वाहिशें कोई न थी जिन्दगी की राहों में।

बस आगे बढ़ते गये कैसे, पता ही नहीं

उम्र की कस्ती बढ़ती गयी भयंकर तूफानी लहरों में।


किनारे कब मिलेंगे, हमको यह पता ही नहीx।

कुछ और भी अनुभूतियाँ जो नीचे दिये चित्रों में हैं।


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