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मुगालता
मुगालता
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© anjani srivastav

Inspirational

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इस मुगालते में मत रहना की

उड़ के आसमान हो जाओगे

तय है इसी जमीन पर कभी

फड़फड़ाते हुए नजर आओगे

कुछ पाने की ख्वाहिश में

हम कहां-कहां  घूम लेते हैं

खुशियों के दामन छुड़ाते ही

ग़म आकर चूम  लेते हैं

इबलिस ने फ़रिश्ते को

ऐसा क्या खिला दिया

साज़िश में खुद अपने

उसको भी मिला लिया

जैसे किसी का मुस्कुराना

उन्हें तनिक नहीं सुहाता

हमें भी ऐसे जलने वालों का

साथ निभाना नहीं आता

अपनी बदकारियों का जश्न

तुम यूं कब तक मनाओगे

इस मुगालते में मत रहना की

उड़ के आसमान हो जाओगे

 

कौन जाने वक्त का मिज़ाज

कब शाद कब ख़फा होता है

एक अलग ही तेवर में वो

बेरहम हर दफ़ा होता है

सोई है तकदीर अभी

मत छेड़ो वक्त आने तक

एक मुख्तसर सा सफ़र है

सपनों के सच हो जाने तक

आओ बैठकर साथ दोनों

"मैं" को  हम  बनाते हैं

खुलूस के फूलों को अपने

दिल के गमलों में उगाते हैं

रह सकते हो यकीनन फायदे में

जो दामन साफगोई का थामोगे

इस मुगालते में मत रहना की

उड़ के आसमान हो जाओगे

जिनकी शोहरतों से वाक़िफ़

नहीं हो पाता ये संसार

क्या फायदा है उनकी

लंबी उम्र का आखिरकार

उन पत्थरों का भी क्या

हुआ करता है नसीब

संगतराश जिनको उठा

लाते हैं मंदिरों के करीब

 

अपनी चालाकियों के उस्तूरे

हर गाल पे मत फिराया कर

फुरसतों में कभी-कभी अपने

जमीर को भी जगाया कर

गलतियां झांकती ही रहेंगी

जब तक उनको छुपाओगे 

इस मुगालते में मत रहना की

उड़ के आसमान हो जाओगे

ख़फा सफ़र शौहरत

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