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नारी के रूप हज़ार
नारी के रूप हज़ार
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© Ruchika Srivastava

Inspirational

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खिलखिलाती-सी हँसी नन्हीं-सी परी की,

उसको देखते ही किसी की खुशी ना थमी थी|

जब घर आये थे उसके नन्हे से कदम,

सब यही पूछते वो है किधर|

बढ़ते वक्त ने उसे बड़ा कर दिया,

अपने कदमों पे खड़ा कर दिया|

जब नन्हीं परी से वो नारी बन गयी,

तब ज़िन्दगी उसकी कहानी बन गयी|

चूल्हे-चौके के बीच धुंधली उसकी हँसी हो गयी थी,

जो उसकी आँखे नम कर गयी थी|

दूसरों के राह पर चलती जा रही,

और अपने को भूलती जा रही|

भूखी सो जाती अपने बच्चों के लिये,

सब कुछ कर जाती उनके लिये,

वो नारी माँ है|

सबका बढ़ाती सम्मान,

कभी ना गिराती किसी का मान,

ऐसी नारी बहू है|

रखती अपने भाई का ख्याल,

और करती उससे बेशुमार प्यार,

ऐसी नारी बहन है|

मम्मी की प्यारी,

और पापा की दुलारी है,

ऐसी नारी बेटी है|

एक नारी के हज़ार रूप है,

उनकी ये कला क्या खूब है|

कभी ना दुखाओ उनका दिल,

पता नहीं बाद मे मिले ना फिर|

उनके बगैर ज़िन्दगी एक सज़ा है,

वही तो जीने की वजह है|

नारी अनेक रूप ज़िन्दगी

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