यात्रा
यात्रा
जीवन में यात्राओं का बड़ा महत्व है। किसी ने सही कहां है, कि अगर आप को समझदार बनना है, तो आप यात्राएं कीजिये। इस दुनिया में संप्रेषण या दूरसंचार का जितना भी विकास हुआ है, उसके मूल में कहीं ना कहीं यात्राएं ही है। मनुष्य ने जब एक जगह से दूसरी जगह पर यात्राएं करना प्रारंभ किया, तभी यह दुनिया एक दूसरे से जुड़ पायी। मनुष्य का स्वयं तथा विज्ञान का विकास भी यात्राओं पर ही टिका है। "वसुधैव कुटम्बकं" जैसी विश्वव्यापी अवधारणा भी मनुष्य द्वारा की गई यात्राओं का ही परिणाम है।
यात्राएं आप को केवल समझदार ही नहीं बनाती हैं, बल्कि जीवन के हर पहलू से आपकी जानकारी कराती है। सच ही है अगर जीवन का वास्तविक अनुभव करना है, तो आप खूब यात्राएं करें।
मूलतः मनुष्य ही एक ऐसी जाति है, जिसकी यात्रा जन्म से प्रारंभ होती है तथा मृत्यु पर्यंत वह यात्रा चलती रहती है। इस जीवन में हम एक यात्री की तरह प्रवेश करते हैं, और जीवनपर्यंत भ्रमण करते हुए, अंत में अपनी मंजिल को प्राप्त करते है। संपूर्ण विश्व और भारत में जितने भी दार्शनिक या विचारक हुए है, सब ने अपने जीवन में लंबी दूरी की यात्राएं की है। उन यात्राओं के अनुभव ने ही उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। यात्राओं के अनुभव ने ही मनुष्य के जीवन में नवीन विचारधाराओं व कल्पनाओं की उत्पत्ति की है।
कभी-कभी ऐसा लगता है कि यह जीवन ही यात्राओं के लिए बना है, या कहें मनुष्य बना ही यात्राओं के लिए है। आप अपने संपूर्ण जीवन को केवल यात्रा करते हुए व्यतीत कर दें, यही जीवन का सौभाग्य होगा। जैसे विवेकानंद जी ने देशान्टन द्वारा ही समझा कि भारत क्या है। भारतीयता क्या है। धर्म क्या है। जीवन का उद्देश्य क्या है। स्वयं तथा जीवन के सभी प्रश्नों का जवाब जैसे यात्राओं में ही छिपा है।
आजकल यात्रा करते समय पूर्व योजना बनाकर यात्रा करने का चलन उत्पन्न हो गया है। व्यक्ति कहीं भी जाने से पूर्व ही सब कुछ पहले तय कर लेता है, कि कहाँ जाना है, कैसे जाना है, किस प्रकार से भ्रमण करना है। जो भी सुविधाएं उसको चाहिए, उन सुविधाओं हेतु वह पहले ही योजना बनाकर तैयारी कर लेता है। परंतु ऐसी यात्राएँ आपके ह्रदय में जिज्ञासा या कौतूहल उत्पन्न करने वाली नहीं होती है। ऐसी यात्राएँ केवल औपचारिकता होती है यात्रा के नाम पर। ऐसी यात्राएँ बांध देती है आपको एक ऐसे बक्से में जहाँ से बाहर निकलने में आप डरते है तथा स्वयं को असहज महसूस करते है। अगर आपको वास्तविकता में यात्राएं करनी है, तो आप बिना किसी पूर्व योजना के केवल यात्रा करने के उद्देश्य से बाहर निकलें। बिना पूर्व योजनाओं के की गई यात्राएं आपके मन में जिज्ञासा, कौतूहल, डर और आत्मविश्वास उत्पन्न करती हैं। नवीन के प्रति आपके अंदर जो डर है, उनकों यात्राएं समाप्त करती हैं। सत्य की खोज का मूल मार्ग है, आकस्मिक रूप से की गई यात्राएं। देश और दुनिया की जानकारी प्राप्त करनी है, तो ऐसी यात्राएं ही आपके लिए उपयोगी साबित होती है। पूर्व में कार्य योजना बनाकर की गई यात्राएं केवल आराम के लिए की जा सकती है। या कहें बिना किसी उद्देश्य के की जा सकती है। परंतु वास्तविक यात्राओं हेतु मनुष्य को थोड़ा सा असामाजिक और आत्मकेंद्रित होना पड़ता है। थोड़ा उसे घुमक्कड़ और सुविधाओं के प्रति थोड़ा लापरवाह होना पड़ता है। सार शब्दों में कहें तो यात्री को फ़कीर होना पड़ता है। जिसे ना दिन की चिंता हो, ना रात की, ना मार्ग की चिंता हो, ना मंजिल की। इसीलिए कहां गया है कि एक अच्छे यात्री की कोई तय योजना नहीं होती और वह कहीं पहुंचने पर आमादा नहीं होता।
यात्राएं की जाती है बिना किसी उद्देश्य और कार्य के, केवल यात्रा करने के लिए यात्राएं। ऐसी यात्राएं आपके अंदर भर देती है, असीम आनंद, अनंत ऊर्जा, जोश, जिज्ञासा, उत्साह और कौतूहल, जो आपको प्रेरित करता है, पुनः यात्राओं और एक अशांत यात्री बनने हेतु।
