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यादें

यादें

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कॉलेज के दिन हर किसी के जीवन का बड़ा ही सुनेहरा पल होता है। उन दिनो कि यादें बहुत ही खास और अहम होते हैं।

मेरे कॉलेज के वह दिन मेरे लिए बहुत ही यादगार थे। उस दिन कॉलेज में Inter college Chanceller cup के लिए एक तर्क प्रतियोगिता चल रहा था। इसके दो दिन पहले ही कॉलेज में एक तर्क प्रतियोगिता कर के हमारे कॉलेज से तीन छात्रों को चुना गया था। जिसमें मैं दूसरे नम्बर पर थी। वह कॉलेज कि बात थी। पर यहाँ तो दूसरे कॉलेज से बहुत सारे लड़के लड़कियाँ इक्कठा हुए थे।

जब ११ बजे मैं ऑडिटोरियम् में गई तो ६/७ प्रतियोगि थे। पर देखते देखते सारा हॉल प्रतियोगियों से भर गया।मेरे मन में घबराहट बढ़ रही थी कि आज क्या होगा? क्या में इतने सारे प्रतियोगियों के सामने कुछ बोल पाउगीं। एक अजीब सा डर मेरे मन में बैठ गया था।

तभी हमारे कॉलेज के अध्यापक आए और तर्क प्रतियोगिता का विषय हमें बताया। उस दिन तर्क का विषय था "भारत के लिए गुट निरपेक्षता जरूरी है"। पहले मेरे पास जो किताब था उसमें से मैंने तलाश किया। फिर भी मुझे कुछ अलग करना था। इसलिए मैं अपने हिन्दी अध्यापक कि सहायता लेने कि सोच कर उनके पास गई। उन्होने मेरी सहायता की। उसके बाद मैं वापस लौट आई।

कुछ समय बाद प्रतियोगिता शुरू हुआ। मुझे ४ नम्बर पर कहने का मौका मिला। मैं अपनी बात बोल रही थी की उसी बीच मैंने भारत को सोने कि चिड़िया क्यों कहा जाता था उसका वर्णन भी किया। तभी इस बात पर हॉल तालियों कि आवाज़ से गूँज उठा। मैं अपना तर्क ख़तम करके वापस लौट आई। सबने अपना अपना तर्क रखा।

अंत में रिजल्ट कि बरी थी। जज बने प्रध्यापकों ने कुछ सोच विचार करके जो बात कहा उससे मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था। उन्होने मुझे फाइनल के लिए चुन लिया था। इसमें मैं पहले स्थान पर थी। हमें फाईनल में Utkal university जाना था।

ये मेरे जिन्देगी का सबसे खास पल था। क्योंकि पहली बार जब स्कूल में हिन्दी में भाषण देने गई थी तभी मेरी छोटी सी ग़लती पर मेरे शिक्षक ने मुझे दो घन्टे तक खड़े रहने को बोला था, वो भी स्कूल के सभा में सभी बच्चों के सामने। तब मुझे बहुत गुस्सा भी आया था। पर आज मुझे पता चला कि अगर उस दिन मुझे शिक्षक ऐसी सजा न देते तो ना मैं अच्छी तरह हिन्दी बोलने कि कोशिश करती न आज इस मुकाम तक पहुंच पाती।

आज जब स्कूल में शिक्षक के दण्ड देने पर रोक लगाया जा रहा है तो मुझे लगा ऐसा करना ठीक नहीं है। थोड़ा बहुत दण्ड तो मिलना चाहिए। जिससे जिंदगी को सुधारा जा सके।


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