“याद करना, लौटना नहीं”
“याद करना, लौटना नहीं”
तुम्हारी थीसिस की एक कॉपी आज भी मेरे लैपटॉप में पड़ी है… और मैंने उसे पढ़ा।
सच कहूँ तो, मैं आमतौर पर किसी से अलग होने के बाद किसी को याद नहीं करता, बस आगे बढ़ जाता हूँ।
तुम शायद सोच रही होगी कि मैं तुम्हारे साथ बिताए उन तमाम सालों को याद कर रहा हूँ
बारिश में स्कूटी पर भीगना,
गर्मियों में रात एक बजे आइसक्रीम खाने निकल जाना,
सर्दियों में तुम्हारे लिए आलू पराठा बनाना,
सुबह तुम्हारे हाथ की चाय और पोहा…
(सच बताऊँ तो मुझे पोहा कभी पसंद नहीं था, फिर भी तुम्हारे लिए खा लिया करता था)।
घंटों तक मेरे लिए खाना बनाना, और साथ में खाना
लॉन्ग ड्राइव पर जाना,
वो हमारा पसंदीदा गाना… जिसे अब मैं कभी नहीं सुनता।
मेरी टी-शर्ट और बैगी जींस पहनकर तुम्हारा क्लास जाना…
और आज भी मेरी वो सारी टी-शर्ट और बैगी जींस तुम्हारे पास ही हैं।
तुम्हारी गणित कमाल की थी…
तुम्हारे सॉल्यूशंस देखकर बस “वाह” निकल जाता था।
तुम्हारी फिलॉसफी… ओह गॉड…
याद है? हम पूरी-पूरी रात सुकरात, प्लेटो, अरस्तू और कार्ल मार्क्स की थ्योरी पर बात करते हुए काट देते थे।
तुम्हारे साथ उन बातों में कितना सुकून मिलता था।
तुम्हारा ज्ञान कमाल का था…
और तुम्हारी रीजनिंग की वो ट्रिक — 11/2 (clock ) सब कुछ कितना आसान बना देती थी।
सब खत्म होने के बाद एक बार हम अचानक टकरा भी गए थे…
मैं देख रहा था, तुम कैसे घबराकर गहरी-गहरी साँसें लेने लगी थीं।
और मैं वहाँ से चुपचाप निकल गया।
क्योंकि हमारे पास एक काग़ज़ था…
जिस पर लिखा था....अब दोबारा कभी नहीं मिलेंगे।
और हमने वही किया… जो उस काग़ज़ ने कहा था।
मुझे पता है, तुम्हारे भी बहुत सारे सवाल हैं…
और मेरे भी।
और हम ये भी जानते हैं कि अब उन सवालों के जवाब
कभी नहीं मिलने वाले।
ये सच है कि मैं तुम्हें मिस करता हूँ…
और ये भी उतना ही बड़ा सच है
कि मैं तुमसे दोबारा कभी मिलना नहीं चाहता।
क्योंकि मैं एक तय वक्त तक ही कोशिश करता हूँ…
उसके बाद अगर तुम उस समय तक नहीं आए,
तो फिर तुम कभी नहीं आओगे
ऐसा मेरा मानना है।
मैं इस बात पर यक़ीन नहीं करता
कि प्यार सिर्फ़ एक बार होता है।
मुझे लगता है प्यार तब तक होता है
जब तक इंसान थक नहीं जाता…
या फिर उसे कोई “परफेक्ट” साथी नहीं मिल जाता।
मैं तुम्हारे साथ खुश था... और मै अब भी बहुत खुश हूं।
या यूं कहे तो अब मै जायदा सुकून में हूं।

