उठ चल खड़े हो........
उठ चल खड़े हो........
मंजिलें चाहें कितने भी कठिन और बड़े हों,
उठ चल खड़े हो,
कितने भी लोग आपकी निंदा करने के लिए रास्ते पे पड़े हो,
उठ चल खड़े हो,
कह देना तुम लोगो से फिर चाहे वो तुझसे उम्र में ही क्यों ना बड़े हो,
उठ चल खड़े हो,
लाख माने दुनिया की तू जिद छोड़ दे और तेरे पीछे पड़े हो,
तू उठ चल खड़े हो,
चींटी भी चलती ह अपनी चल मस्ती से चाहे हाथी ही क्यों न उससे बड़े हो,
फिर तू तो है इंसान चल उठ खड़े हो।
