एक भूतिया बांग्ला और चार सिपाह
एक भूतिया बांग्ला और चार सिपाह
एक बार एक शहर हुआ करता था तंगुलापद। जहां पे लोग बिना बात के जीवन गुजारा करते, वो बिना बोले हर चीज करते और कहते थे और तंगुलापद के राजा मीनारचंद एक बहुत बड़े योद्धा भी थे। उनके राज्य में ना तो कोई कुछ बोल सकता है न ही कुछ गुनगुना सकता है। एक बार एक युद्ध हुआ दो राज्यों के बीच युद्ध हुआ और जिसमें से एक राज्य तंगुलापद भी था। जब जब राजा मीनारचंद से पूछा गया की आप को किस राज्य का अधिकार चाहिए युद्ध के बाद तो मीनारचंद जी जो बोलना पसंद नहीं करते वो बोल ना पाए जिसके कारण से वो युद्ध नहीं हुआ और राजा को युद्ध से छुटकारा मिल गया। राजा के चुप रहने की वजह ही यही थी की वो कोई युद्ध नहीं चाहते ताकि वो और उनकी प्रजा सुखी जीवन व्यतीत कर पाए और इसी तरह राजा को उनकी प्रजा बहुत स्नेह देती थी और कभी कुछ नई बोलती थी।
