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हरि शंकर गोयल

Comedy

4  

हरि शंकर गोयल

Comedy

सुपर पावर

सुपर पावर

5 mins
228


देखी तो नहीं पर सुना जरूर है कि कोई "सुपर पावर" होती है । "सुपर पावर" का होना एक "फैंटेसी" ही है और लोगों को फैंटेसी की दुनिया बहुत अच्छी लगती है । वहां सब कुछ अच्छा ही अच्छा है । 72 हूरें और वो भी एक से बढकर एक । आम आदमी तो उन्हें देखकर ही मर जाये । बला की खूबसूरत होती हैं ये हूरें । तभी तो इनके लिए आदमी आतंकवादी बनकर हजारों निर्दोष व्यक्तियों की जान ले लेता है । पर ये हूरें भी कैसी हैं कि इन्हें आतंकवादी ही पसंद आते हैं क्योंकि वहां आतंकी ही जा सकते हैं और किसी के बस की बात नहीं है । खैर , जो भी जाये हमें क्या ? हम तो जाने वाले नहीं हैं । अजी छोड़िये जी इन बातों को । क्या रखा है इनमें । बचपन में मां "परियों की कहानियां" सुनाती थीं । एक से बढ़कर एक परी । कोई पंखों वाली तो कोई जादू की छड़ी वाली । पलक झपकते ही सारा काम कर देती थीं वो परियां । इसलिए हम भी एक "परी" की ख्वाहिश पाल बैठे । मां से कहते कि हमें भी एक सुंदर सी परी चाहिए । मां कहती "रोज सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्म करके विद्यालय जाओ । मन लगाकर पढाई करो तब मिलेगी कोई परी" । 

मां की बात मानकर हम वो सब करते चले गये । फिर शादी हो गई मगर परी के दर्शन नसीब नहीं हुए हमें । हमें लगा कि मां ने हमसे धोखा किया है । परी का लालच देकर हमें भरी सर्दी में सुबह 5 बजे ठंडे पानी से नहला देती थीं । मगर इतना सब करने के बाद भी परी नहीं मिली तो फिर वो सब करने का क्या फायदा ? 

एक दिन हमने डरते डरते अपनी बात मां के समक्ष रख ही दी । मां बोली "बहू आ तो गई । ये सबसे सुंदर और प्यारी परी है । इससे बड़ी परी और कौन है भला ? शर्ट के टूटे बटन से लेकर आदमी के टूटे दिल तक को जोड़ देती है यह । फटे कपड़े से लेकर फटे दूध तक को सिल देती है । इससे ही घर में लक्ष्मी का भण्डार है और इससे ही ये घर संसार है । ये परी पलक झपकते ही घर बाहर का सारा काम कर देती है । और कैसी परी चाहिए तुम्हें" ? 

मां की बात काटने की हिम्मत नहीं थी हम में । बात सही भी थी लेकिन पुरुषोचित अकड़ के कारण ऐसे कैसे मान लेते सो मैंने कहा 

"मां , तुम सही कहती हो । ये बहुत सुंदर है , प्यारी है , ये सब ठीक है । मगर ये ऐसी परी है जो "जली कटी" न केवल खिलाती है अपितु सुनाती भी है । ये आंखों से प्यार की वर्षाकम और क्रोध की वर्षा ज्यादा करती है" ।

मैं कुछ और कहता कि इतने में मेरे कान के पास से कोई चीज दनदनाती हुई गुजरी । मां को बहू के बारे में कुछ भी सुनना पसंद नहीं था इसलिए उन्होंने अपने पास रखा हुआ एक "बेलन" फेंक मारा । वो तो गुस्से के कारण निशाना चूक गया वरना पता नहीं क्या हो जाता । तब तो नहीं मगर अब समझ में आया है कि पत्नियों में वास्तव में एक "सुपर पावर" होती है । 

कुछ बड़े हुए तो अलादीन और उसके चिराग के बारे में सुना । कहानियों में पढते थे कि अलादीन के पास एक चिराग था । उस चिराग को घिसते ही एक "जिन्न" प्रकट हो जाता था और वह बड़े प्यार से कहता है "क्या हुक्म है मेरे आका" ? तब अलादीन उसे जो भी काम बताता वह जिन्न पल भर में वह काम कर देता था । काश ऐसा चिराग हमारे पास भी होता । पता नहीं हम क्या कर देते अब तक ? लगता है कि वह जिन्न किसी अंबानी या अदानी के घर में नौकरी करने तो नहीं लग गया है ? अंबानी और अदानी के जिस तरह सारे काम हो रहे हैं उससे तो यही लगता है । वैसे एक राज की बात बतायें, इन उद्योगपतियों को बड़े बड़े लोगों को "वश" में करना अच्छी तरह आता है । तो इन्होंने जिन्न को भी अपने वश में कर लिया होगा । उद्योगपतियों के काम पलक झपकते ही हो जाते हैं क्योंकि ये "चंदा" रूपी प्रसाद दान कर जाते हैं ना । 

बाद में थोड़े और बड़े हुए तो "स्पाइडरमैन", "आयरन मैन" के बारे में सुना, पढा और देखा । उन जैसी सुपर पावर को पाने की लालसा और भी दृढ हो गयी । हम सोचते थे कि काश भारत में से ये धर्म, जाति, अमीरी गरीबी , अगड़ा पिछड़ा , रंग रूप के सारे झगड़े एक ही झटके में हल हो जायें और यह देश सुपर पावर बन जाये । 

इसी बीच भारत में दूरदर्शन पर एक "शक्तिमान" आ गया । हम उसी के कारनामे देख देखकर खुश हो लेते थे । बाद में फिल्म "कृश" में हीरो जब "स्टंट" करता है तो कसम से सुपर पावर की सी फीलिंग्स आ जाती है । 

अब दुनिया का ही उदाहरण ले लो । कल तक अमरीका "सुपर पावर" था , आज भी है मगर आगे भविष्य बड़ा अंधकार में है उसका । उसके कारनामे भी ऐसे ही हैं । इस कारण वह अब ज्यादा दिनों तक सुपर पावर बना नहीं रह सकता है । आगे तो चीन और भारत दोनों ही सुपर पावर होने वाले हैं , बस थोड़ा सा वक्त लग सकता है" । 

 


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