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Reshma Choudhary

Inspirational

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Reshma Choudhary

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सपनों की उड़ान: डॉक्टर लक्ष्मी

सपनों की उड़ान: डॉक्टर लक्ष्मी

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ढोलकपुर गाँव में १२ साल की लक्ष्मी अपने परिवार के साथ रहती थी। वह पढ़ने में बहुत होनहार थी, लेकिन परिवार की तंगहाली के कारण उसे स्कूल छोड़ना पड़ा। घर का खर्च चलाने के लिए वह दूसरों के घरों में बर्तन मांजने लगी। इससे परिवार को दो वक्त की रोटी तो मिल जाती, लेकिन लक्ष्मी के दिल में पढ़ाई की चाहत हमेशा बनी रहती थी।एक दिन लक्ष्मी ने हिम्मत करके अपने पिता से कहा, "पापा, मुझे भी भाई की तरह स्कूल जाना है।"उसके पिता ने झिड़कते हुए कहा, "अपने भाई से बराबरी मत करो! वह बड़ा होकर हमारा पेट पालेगा। तुम तो पराया धन हो, शादी करके दूसरे घर चली जाओगी। पढ़ाई का वहम दिमाग से निकालो और घर का काम करो।" पिता की बात सुनकर लक्ष्मी का दिल टूट गया, लेकिन उसने हार नहीं मानी।अगले दिन लक्ष्मी काम पर जाने के बजाय सीधे सरकारी स्कूल पहुंच गई। पिता इस बात पर बहुत नाराज हुए, लेकिन लक्ष्मी के कदम नहीं डगमगाए। इस संघर्ष में उसकी माँ ने उसका पूरा साथ दिया और कहा, "जाओ बेटी, पढ़ो! तुम एक दिन हमारा नाम जरूर रोशन करोगी।" माँ की प्रेरणा से लक्ष्मी जी-जान से पढ़ाई में जुट गई।लक्ष्मी की मेहनत रंग लाई और उसने १०वीं की परीक्षा में पूरे स्कूल में टॉप किया। पिता अब भी उसकी सफलता से खुश नहीं थे, लेकिन लक्ष्मी आगे बढ़ती रही। उसने स्कूल की हर प्रतियोगिता में भाग लिया और कई सर्टिफिकेट जीते।एक दिन उसने एक बड़ी शैक्षणिक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जिसकी इनामी राशि ₹५०,००० थी। लक्ष्मी ने अपनी बुद्धिमानी से वह प्रतियोगिता जीत ली। इन पैसों से उसे आगे की पढ़ाई में बड़ी मदद मिली।अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बल पर लक्ष्मी ने मेडिकल की परीक्षा पास की और एक एमबीबीएस  डॉक्टर बन गई। जब उसके पिता को इस बात का पता चला, तो उनकी आँखों से पछतावे के आँसू बह निकले।उन्होंने रोते हुए कहा, "बेटा, मुझे माफ कर दो। मैं समझता था कि बेटियां पराया धन होती हैं, पर तुमने मेरी आँखें खोल दीं।" लक्ष्मी ने मुस्कुराकर अपने पिता को गले लगाया और कहा, "कोई बात नहीं पापा, भूल सबसे होती है। बस कभी किसी लड़की को कमतर मत समझना, क्योंकि हम भी इंसान हैं और हमारे भी सपने होते हैं।"


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