समय का टूटा हुआ आईनाThe Fractured Mirror of Time
समय का टूटा हुआ आईनाThe Fractured Mirror of Time
आर्यन की जिंदगी का सबसे निर्णायक पल ठीक सुबह 8:15 बजे आया, जब उसने अपनी लैब में कदम रखा। लैब का वातावरण हमेशा की तरह ठंडा और शांत था, जहाँ चारों ओर सुपरकंप्यूटरों की गूँज और डेटा के केबलों का जाल बिछा हुआ था।
आर्यन एक बेहद महत्वाकांक्षी 'क्रोनोस प्रोजेक्ट' पर काम कर रहा था, जिसका उद्देश्य समय के प्रवाह को नियंत्रित करना था। उसने अपनी घड़ी को एक सेकंड आगे बढ़ाने का फैसला किया.. एक ऐसा प्रयोग जो सालों की मेहनत का निचोड़ था। यह एक मामूली सा फैसला लग रहा था, लेकिन उसी एक सेकंड की हरकत ने हकीकत के धागों को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया।
जैसे ही उसने कंट्रोल कंसोल पर बटन दबाया, लैब की नीली और सफेद रोशनी एक झटके के साथ गहरी और तेज लाल रंग में बदल गई। हवा का दबाव अचानक बदल गया, जिससे उसके कान के पर्दे फटने लगे। आर्यन को लगा जैसे उसके पैरों के नीचे की जमीन हिल रही है, मानो गुरुत्वाकर्षण के नियम अचानक बगावत कर रहे हों। जब उसने चारों ओर देखा, तो पूरी प्रयोगशाला बदल चुकी थी। दीवारें अब स्टील और कांच की नहीं, बल्कि जमे हुए समय के नुकीले और पारभासी टुकड़ों से बनी थीं, जो किसी आईने की तरह उसकी परछाइयों को हजार टुकड़ों में दिखा रहे थे।
खिड़की से बाहर देखने पर, उसने जो देखा उसने उसे स्तब्ध कर दिया। आसमान में दो जलते हुए सूरज एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चमक रहे थे, और बादल पीछे की ओर बह रहे थे। कुदरती कायदे पूरी तरह उलट चुके थे।
आर्यन घबराहट में चिल्लाया, "नहीं! यह कैसे हो सकता है?" उसकी आवाज गूँजकर वापस आई, लेकिन वह उसकी अपनी आवाज नहीं लग रही थी, बल्कि समय की एक विद्रूप हँसी की तरह सुनाई दे रही थी।
इस अजीबोगरीब आयाम में, आर्यन का दम घुटने लगा। उस आयाम का वातावरण ऑक्सीजन से नहीं, बल्कि समय के कणों से भरा था, जिससे उसके फेफड़ों में हवा खींचना दूभर हो रहा था। उसे लगा जैसे उसकी आत्मा पर किसी ने भारी पत्थर रख दिया हो। वह घुटनों के बल बैठ गया, उसका दम घुट रहा था और उसके लिए सांस लेना एक महायुद्ध जैसा था।
तभी, अचानक, उसकी कलाई पर बंधी घड़ी की अलार्म की आवाज सुनाई देने लगी। वह आवाज पहले धीमी थी, लेकिन फिर वह इतनी तेज और लयबद्ध हो गई कि उसे लगा जैसे वह उसकी खोपड़ी के अंदर बज रही हो। उस घड़ी की गूँज ने उस कैद की दीवारों को हिला कर रख दिया।
एक जबरदस्त झटके के साथ, आर्यन उस कैद से बाहर निकल आया। उसके शरीर से पसीना बह रहा था और वह हाँफ रहा था। उसकी आँखें खुलीं और उसने पाया कि वह अपनी लैब की उसी कुर्सी पर बैठा था। वह एक भयानक सपना था, लेकिन वह इतना वास्तविक था कि उसे अब भी डर महसूस हो रहा था।
