मेरा पहला प्यार
मेरा पहला प्यार
कहते हैं कि दुनिया में हर किसी को ज़िंदगी में कभी न कभी पहला प्यार ज़रूर होता है। किसी को किसी इंसान से होता है, तो किसी को अपनी मंजि़ल से।
लेकिन नूर की कहानी थोड़ी अलग थी। नूर के लिए उसका पहला प्यार कोई इंसान नहीं, बल्कि रंगों की खुशबू, कागज़ की सरसराहट और पेंसिल की वो बारीक लकीरें थीं, जिन्हें दुनिया 'ड्रॉइंग' कहती है।
नूर बचपन से ही थोड़ी शांत और अपने आप में खोई रहने वाली लड़की थी। जहाँ उसके उम्र के बाकी बच्चे खिलौनों से खेलते या बाहर दौड़ते-भागते, वहीं नूर घर के एक कोने में बैठकर कोरे कागज़ पर आड़ी-तिरछी लाइनें खींचती रहती।
उसकी उंगलियों में जैसे कोई जादू था। जब वह पेंसिल पकड़ती, तो ऐसा लगता जैसे वह अपनी रूह की बात कागज़ पर उतार रही हो।
उसके लिए ड्रॉइंग सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि उसके दिल की बातें थी। जब वह खुश होती, तो उसकी कैनवास पर शोख़ रंग बिखर जाते थे । जब वह उदास होती, तो उसकी ड्रॉइंग्स में गहरे साये और पेंसिल की बारीक शेडिंग अपनी कहानी खुद बयां करने लगती थी।
वक्त बीतता गया और नूर का यह हुनर उसके साथ-साथ बड़ा होता गया। लेकिन जैसा कि अक्सर होता है,पढ़ाई और परिवार की ज़िम्मेदारियों के बीच कला को हमेशा सिर्फ एक हॉबी मान लिया जाता है।
नूर के सामने भी एक वक्त ऐसा आया जब पढ़ाई और परिवार की ज़िम्मेदारियों की दौड़ में उसके रंग और स्केचबुक धूल खाने लगे।
एक दिन अपनी व्यस्त जिंदगी से थककर जब नूर ने आईने में खुद को देखा, तो उसे लगा कि उसके चेहरे का नूर कहीं खो गया है। उसने महसूस किया कि अपने पहले प्यार यानी अपनी कला से दूर होकर वह अंदर से खाली हो चुकी है।
कला से दूर रहना, खुद को साँस लेने से रोकने जैसा है।" नूर ने खुद से कहा।
नूर ने तय कर लिया कि वह अपने इस हुनर को कभी खुद से दूर नहीं होने देगी। उसने फिर से अपनी पेंसिल उठाई, स्केचबुक खोली और अपनी भावनाओं को कैनवास पर उतारना शुरू किया।
इस बार उसने सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दुनिया को सिखाने के लिए अपनी कला का इस्तेमाल किया।
उसने अपनी पेंटिंग्स और स्केचिंग के हुनर को लोगों के साथ बाँटना शुरू किया।
जब वह कैनवास पर वॉटरकलर फैलाती या पेंसिल से किसी बेजान कागज़ पर एक सजीव चेहरा उकेरती, तो देखने वाले बस देखते रह जाते। उसका हर स्ट्रोक, हर शेड यह चीख-चीख कर कहता था कि यह हुनर ही उसकी असली पहचान है।
आज नूर सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि कला की दुनिया में एक खूबसूरत मिसाल है। लोग उसकी बनाई हुई तस्वीरों में खो जाते हैं। नूर ने दुनिया को साबित कर दिया कि इंसान का पहला प्यार अगर उसका हुनर बन जाए, तो वह उसे कभी टूटने नहीं देता, बल्कि उसे निखारकर और भी खूबसूरत बना देता है।
नूर अक्सर एक बात बहुत शिद्दत से महसूस करती थी कि एक हॉबी सिर्फ वक्त गुजारने का जरिया नहीं होती, बल्कि यह आपके अंदर के असली हुनर और इंसान को जिंदा रखती है।
उसका मानना था कि अगर रब ने आपको कोई हुनर बख्शा है, तो वह तोहफा सिर्फ आपके लिए नहीं होता। आज की इस बेहद तनावभरी लाइफ में, जहाँ हर इंसान किसी न किसी दौड़ में लगा है, वहाँ यह हुनर न सिर्फ आपको खुद से जोड़े रखता है और सुकून देता है, बल्कि दूसरों के लिए भी एक मरहम बन जाता है।
नूर जब भी अपनी कला के जरिए किसी के उदास चेहरे पर मुस्कान लाती या किसी को कला सीखने के लिए प्रेरित करती, तो उसे लगता कि उसका यह पहला प्यार अब दूसरों की जिंदगी के अँधेरों को दूर करने वाली एक खूबसूरत प्रेरणा बन चुका है।
जब भी कोई नूर से उसकी कामयाबी का राज पूछता है, तो वह मुस्कुराकर अपनी उँगलियों में थमी पेंसिल को देखती है और कहती है,
"यह सिर्फ एक हुनर नहीं, मेरी रूह है... मेरा पहला प्यार है।"
NOOR E ISHAL
