स्कूल इंस्पेक्टर
स्कूल इंस्पेक्टर
एक स्कूल में सुबह ही सुबह स्कूल का इंस्पेक्टर निरिक्षण करने को आ गया था। वह पहली ही कक्षा में जो उसके सामने पड़ी उसके भीतर गया। और उसने जाकर तख्ते पर एक सवाल लिखा और विद्यार्थियों से कहाः कि तुम में से जो भी तीन विद्यार्थी इस कक्षा में सर्वाधिक कुशल हो, वे खड़े हो जाएं और एक के बाद एक आकर सवाल को हल करें। आकस्मिक निरीक्षण करने वह स्कूल में आया था। एक विद्यार्थी उठा, जो कक्षा में प्रथम था, उसने आकर बोर्ड पर सवाल किया, ठीक सवाल किया था, लौट कर अपनी जगह जाकर बैठ गया। दूसरा विद्यार्थी उठा, जो कक्षा में द्वितीय था, उसने भी आकर सवाल किया और अपनी जगह जाकर बैठ गया। फिर तीसरा विद्यार्थी उठा, लेकिन तीसरा थोड़ा झिझका, झिझकते हुए बोर्ड के पास आया और सवाल जैसे ही हल करने को था, उस इंस्पेक्टर ने गौर से देखा, तो पाया, यह तो वही विद्यार्थी है जो पहले भी आया था। पहली बार जो आया था यह वही है। और उसने उसका हाथ पकड़ा और कहाः तुम मुझे धोखा दे रहे हो, तुम तो पहली दफा आकर सवाल हल कर चुके हो? तीसरा विद्यार्थी कहां है? उस विद्यार्थी ने कहाः माफ करिए, तीसरा विद्यार्थी आज मौजूद नहीं है, वह क्रिकेट का खेल देखने गया हुआ है और मुझसे कह गया है कि मेरी जगह कोई भी काम हो तो तुम कर देना।
इंस्पेक्टर तो आग बबूला हो गया। उसने कहा यह क्या बात है? क्या तुम दूसरे की जगह परीक्षा दोगे? क्या तुम दूसरे की जगह सवाल करोगे? ये मैंने कभी आज तक सुना ही नहीं, हद धोखा चल रहा है। उसने विद्यार्थी को डांटा, और कुछ नैतिक शिक्षाओं का उपदेश दिया। ऐसा मौका मिल जाए तो शिक्षा कोई भी देता है, छोड़ता नहीं। और उस विद्यार्थी को डांटने के बाद वह शिक्षक की तरफ मुड़ा, जो बोर्ड के पास खड़ा हुआ था। और उससे कहाः महाशय! मैं तो अपरिचित हूं, लेकिन आप तो इस कक्षा से भलीभांति परिचित हैं, आप भी खड़े देखते रहे कि यह विद्यार्थी धोखा दे रहा है और आपने मुझसे कुछ कहा नहीं। उस शिक्षक ने आंख नीची की और कहाः महानुभाव, मैं भी इन्हें पहचानता नहीं हूं। वह इंस्पेक्टर तो हैरान हो गया। उसने कहाः इस कक्षा के शिक्षक हैं और पहचानते नहीं? उसने कहाः असल बात यह है कि कक्षा का शिक्षक क्रिकेट का खेल देखने चला गया है और वह मुझसे कह गया है कि जरा मैं उसकी क्लास देख लूं। मैं इस कक्षा का शिक्षक नहीं हूं।
तब तो बात और भी बिगड़ गई। और इंस्पेक्टर की आंखों से आग निकलने लगी। और वह पैर पटकने लगा और चिल्लाने लगा और उसने कहा कि यह तो हद हो गई। यह तो धोखे की हद हो गई! विद्यार्थी धोखा दे तो दे आप शिक्षक होकर भी धोखा दे रहे हैं? और उसने शिक्षक को भी कुछ उपदेश की बातें कहीं।
अंत में जब वह चलने लगा, तब उसने कहा, बच्चों और शिक्षक को कहाः महाशय, आप भगवान को धन्यवाद दीजिए, नहीं तो आपकी जिंदगी खराब हो जाती, नौकरी पर आंच आ जाती। वह तो अच्छा हुआ कि असली इंस्पेक्टर क्रिकेट का खेल देखने गया है। मैं तो उसका दोस्त हूं जो उसकी जगह निरीक्षण करने आ गया हूं।
