सबसे सुन्दर बगीचा
सबसे सुन्दर बगीचा
सबसे सुन्दर बगीचा
एक बार की बात है शोभित फूलों के बगीचे के पास से गुजर रहा था। उसे एक सुंदर सा फूल दिखाई दिया। वह उसे तोड़ने के लिये आगे बढ़ा।
उसने फूल को तोड़ने की जैसे ही कोशिश की, तब तक उस बगीचे की मालकिन बाहर निकल आईं। उस बगीचे की मालकिन ने सोचा कि अगर मैं इस बच्चे को डांटूगी तो वह कभी नहीं मानेगा।
' बेटा, क्या नाम है तुम्हारा ?' प्यार से उन्होंने पूछा।
' शोभित।' डरते हुए उसने कहा।
' तुम्हें फूल चाहिए।' उन्होंने फिर पूछा।
' हाँ आंटी।'
' ठीक है, तुम रुको, मुझे बताओ कौनसा फूल तुम्हें चाहिये। देखो तुमने एक फूल के लिये बगीचे के कई पेड़ों को कुचल दिया है। हमें पेड़ पौधों को तोड़कर या कुचलकर अपनी धरती माँ और पर्यावरण को नष्ट होने से बचाना है। ' उन्होंने उसे उसकी पसंद का फूल तोड़कर देते हुए कहा।
' सॉरी आंटी। मेरी मम्मी भी यही कहती हैं । अब मैं अपने घर के बगीचे में लगे पौधों में ध्यान से पानी दिया करूँगा। किसी पौधे को मरने नहीं दूंगा।'
' तुमसे मुझे यही आशा थी।' कहते हुए आंटी ने उसे माफ कर दिया।
घर लौटते हुए शोभित सोच रहा था कि वह आंटी की बात सदा ध्यान रखेगा। अपनी धरती की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है वरना दिन ऐसा आएगा कि हमें सांस लेने के लिये शुद्ध हवा भी नहीं मिलेगी। इसके साथ ही बिना पूछे वह किसी के बगीचे में नहीं जाएगा। चोरी करना बुरी बात है चाहे वह फूल की ही क्यों न हो।
... आयुशी बंसल
कक्षा 5
डी पी एस
बंगलोर ईस्ट
