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पर मैसेज नहीं आया

पर मैसेज नहीं आया

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तो उन रास्तों से आना जाना मेरा रोज़ का हिस्सा था हमेशा की तरह मैं अपनी धुन में मस्त गाते गाते सोचता सोचता निकल ही रहा था कि उन जानी पहचानी दो आँखों ने मुझे अपनी ओर खींचा, उसने अपना चेहरा ढके हुए थामैंने गाड़ी रोकी और उसकी तरफ बढ़ा,पर दो पल के बाद वो मेरे सामने नहीं थीतीन चार रोज़ ऐसा ही चलता रहाएक दिन घर को जल्दी लौटते हुए मैं ने साहस करके उससे पूछ ही लिया, जैसे ही उसने अपने चेहरे से नक़ाब हटाया मेरा मन अनेकानेक क्रीड़ाये करने लगाहाँ वो वही थी जिसको रोज़ में अपने स्वप्नों में देखा करता थाजिसको रोज़ यादों में पाला करता था

मैंने उसको ७ साल बाद देख रहा थाउसको देखने मात्र से जो ख़ुशी मुझे मिल रही थी शायद वो बाकी सब भावनाओं से पर थी, वो जो भी थी

अद्भुत थी, नया थी

ऐसा मेरे साथ पहले कभी न हुआ था, मुझे पहचानने के बाद उसने बातें शुरू की और बातों ही बातों में मुझसे मेरे व्हाट’स ऍप नंबर के लिए कहाऐसा सुनते ही मेरी ख़ुशी का ठिकाना न थामैंने अपने नंबर दिए ही थे की उसकी बस आ पहुँची, उसको निकलना था उसने इशारों में कहा की वो मुझे मैसेज करेगीमैं भी अपने घर की और निकल पड़ामैं उसकी यादों में मग्न था कि आज उससे बात होगी, मैं क्या बात करुँगा??? मैं …

मैं इंतज़ार करता रहा कि उसका मैसेज आएगामैं उस रात और आने वाली ५ रातों में ठीक से नहीं सो पाया इंतज़ार में की उसका मैसेज आएगा

मैं अक्सर उस दिन को याद करता हूँ और सोचता हूँ शायद आज मैसेज आए शायद आज वो हसीं दिन होपर वो हसीं दिन नहीं आता, पर मैं आज भी इंतज़ार करता हूँ


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