मनुष्यता
मनुष्यता
मनुष्य की मनुष्यता नेेे ,आज साथ छोड़ दिया
दया, धर्म, सत्य, कर्म का ,ही पथ छोड़ दिया।
सत्य और असत्य के ,भेद को ना कह सके ।
मनुष्य की उस सत्यता ने ,आज साथ छोड़ दिया। ।
प्रेेेेम और स्नेह के भाव थे कभी भरे।
मनुष्य की उस स्नेहता ने आज स्नेह छोड़ दिया। ।
भाषाा है बड़ी बड़ी,शब्द हैैं बड़े बड़े ।
भाषा की अधिकता ने भावो को आज छोड़ दिया ।।
मनुष्य की मनुुष्यता ने आज साथ छोड़ दिया।
दया ,धर्म ,सत्य, कर्म का पत्र आज छोड़ दिया।।
