मन की आवाज़(कविता)
मन की आवाज़(कविता)
बाहर की दुनिया का शोर बड़ा था,
राहुल मन में हार कर खड़ा था।
शिक्षिका संगीता ने आकर ढाढस बंधाया,
भीतर की ताकत का अहसास कराया।
कहा—"सुनो तुम अपने मन की पुकार,
डरो मत, तुम जीतोगे इस बार।
"राहुल ने बंद किया दुनिया का शोर,
कदम बढ़ाए अपनी मंज़िल की ओर।
गणित की उस कठिन परीक्षा में,
अव्वल आया वह सबकी अपेक्षा में।
मन की आवाज़ ने ऐसा जादू दिखाया,
एक सहमे बच्चे को विजेता बनाया।।
