मेरी कहानी
मेरी कहानी
खुद की बात किसे कहूँ,
कहूँ भी तो किसे कहूँ,
सुनने वाले हजार है लेकिन अपनी जज़्बातों को मैं कैसे बयाँ करूँ,
लिखना तो बहुत कुछ चाहता हूँ लेकिन जीवन के उतार चढ़ाव कैसे लिखूँ। आज भी कानों में आवाज गूंजती है, बंद कमरे में आज भी बैठा रहता हूँ, तब सोचता हूँ, आखिर मेरी खामोशी मुझे कहाँ ले आई ? कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ लेकिन कह नहीं पाता हूँ, लिख रहा हूँ अपनी जीवन का हर पल, लेकिन मृत्यु तक कैसे बताऊँ उस दर्द को, जो बीते बाते है।
7 बिलियन लोग, 7 बिलियन कहानी लिख रहे हैं। एक दिन में लेकिन मेरी कहानी उन सबसे अलग है। यादों में जहन में घुल गया है, कैसे बताऊँ इस दुनिया को वो दर्द क्या है, किसी दौर से गुजरा, उस हकीकत का हिस्सा मुझे खुद को नहीं पता, जानते हुए भी कुछ नहीं कर पाया। चार दीवारों में बैठे आज भी सोचता हूँ आखिर मेरी गलती क्या है, उम्र में छोटा था चॉकलेट के लिए दिल मचल गया था लेकिन उसके लिए दर्दभरी कहानी घटी उसे कैसे बताऊँ, कहना तो चाहता हूँ लेकिन आवाज कैसे उठाऊँ, चलना तो चाहता हूँ लेकिन मंजिल पता होते हुए भी चेहरे नजर में घूम रहा है लेकिन नाम पता गुमनाम है।
जिक्र करूँ तो गलत समझने वाले बहुत है मेरी दर्द मेरी कहानी जहन में आज भी जिंदा है, न जाने वो पल खो गया लेकिन आज भी यादें जहन में घेरकर बैठी हुई है, चाहता तो हूँ उसे सजा दिलाऊँ लेकिन अभी आवाज उठाने के लायक नहीं हुआ हूँ उठाऊँ भी तो कैसे वह जगह गुमनाम हो गया, वह जिंदा भी है या दफन हो गया, मेरी जज्बातों को कैसे बताऊँ, लिख रहा हूँ एक अध्याय अभी तो पूरी कहानी लिखना बाकी है,
उड़ान के लिए रास्ते और साथ मिल गया है यही मेरी अमानत है, लिखता रहूँगा हर कहानी उस कहानी के बाद बदलाव की कहानियाँ सुनानी बाकी है।
