मेहनत और संकल्प
मेहनत और संकल्प
मेहनत
लेकर पसीने की स्याही से
इरादों का मुकद्दर सजाना
जीवन गाथा नूतन लिखना,
खुशियों की लड़ियां लगाना
छाए चारों ओर हरियाली
पेड़ पौधे इस ऋतु लगाना
बारिश संग तुम भी भीगना
नवीन सपनों के बीज रोपना
नयी फसल सपनों की उगाना
सुनहरे भविष्य की नींव रखना
हाथ मदद के कुछ ऐसे बढ़ाना
सब साथियों को तेरे रंग रंगना
नई पीढ़ी के नये सपने नये करतब
लाएंगे सामाजिक परिवर्तन अब
रोक टोक न होगी महिलाओं को
उच्च शिक्षा उच्च पद पाने की उनको
कदम से कदम मिला पति पत्नी दोनों
बच्चों का संवारेंगे सुंदर सा भविष्य
परिवार उन्नत, समाज होता उन्नत
दोनों ही जब हैं उन्नत देश भी उन्नत
विश्व के बने सिरमौर , मेहनत लाए रंग
मेहनत से बनती गगनचुंबी इमारतें
मेहनत से चमकता है तेरा भविष्य
किसान की मेहनत देती अन्न अपार
सैनिक सजाता है भारत मां का भाल
मेहनत से ही वह तैनात करता रक्षा
मेहनत करते अथाह ये प्रधानमंत्री
देश की सुरक्षा के ये हैं सब प्रहरी।।
संकल्प
चलो मिलकर आज एक नयी सोच बनाएं
न रहे भूखा कोई, न ही कोई हाथ फैलाए
एक घंटा अपनी दिनचर्या से करें श्रम दान
एक संगठन बने आस पास सभी को जोड़े
नजदीक में हो जो कोई भी मंगल कार्य क्रम
भोजन न बचे झूठा , ले उतना जितनी आवश्यकता
व्यर्थ मोरी या कचरे में न फेंके इस खाने को
हम हाथ मिलाकर करें इकट्ठा बचा हुआ खाना
एक एक एरिया में हो एक दो मुखिया ऐसे
वितरण करवाएं ये खाना जरूरत मंद भूखे को
अन्न भी होता सफल पाकर कोई भूखा इंसान
दुआएं मिलेगी कितनी, न जाएगा खाना बेकार
जो शिक्षा का हम मान बढ़ाएं सिखाएं निशुल्क
किसी गरीब असहाय बच्चे को पढ़ना लिखना
अपने बच्चे के छोड़े गए खिलौने बांटते पुस्तकें
कापी पेंसिल रबर पेन कलरस सब कुछ बांटे
इनको सिखाकर अपना भी ज्ञान हम बढ़ाएं
न रहे कोई निरक्षर , समझें इसे , स्वयं पढ़ें पढ़ाएं
इस तरह समाज का ऋण उतरता उन्नति सबकी
हो जाए
चलो हाथ हम सब आगे मिलकर बढ़ाएं
न रहेंगे ये अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम
श्रमदान करें जवानी में बूढ़े होकर वापस पाएं
चलो मिलकर एक ये नयी परम्परा बनाएं
बीमार बूढ़े बच्चों की करें सेवा हम तुम
उऋण स्वयं को हम सब करें ये सोच बनाएं।।
