ज़िंदगी
ज़िंदगी
क्या कभी आपने सोचा है ? इंसान जब तक जीवित रहता है, तब तक "मैं" "मेरा" बस यही करता रहता है। अमीरी -गरीबी तू मेरा नौकर मैं तेरा मालिक, जब सच्चाई सबको पता है सब का अंत वही है, सेम चाहे मालिक हो चाहे नौकर मिट्टी में विलीन हो जाना। राख बन जाना है। सबका सेम होना है। पर फिर भी हम मैं, मेरा, क्यों नहीं छोड़ पाते , जब तक जीवित रहते हैं तब तक इंसान मोह माया में फंसा रहता है
आप इतना भी नहीं जानते हैं कि जब आप मर जाओगे तब आपके अपने बच्चे ही आप के अंतिम संस्कार पर क्या और कितना खर्चा करना है इसका अधिकार भी उनको रहेगा आप का अंतिम संस्कार अच्छे से होना है या नहीं यह उन पर निर्भर रहेगा।
पर फिर भी जीते जी हम मैं, मेरा, नहीं छोड़ पाते।
बात कड़वी है पर सच्चाई यही है इंसान जब तक जीवित है तो वह मां, बाप, भाई, बहन, बीवी, बच्चे, सब कुछ है जो ही उसकी स्वास की माला टूटी तो वह "बॉडी "बन जाता है महज एक "बॉडी"
वाह रे दुनिया वाह तेरा फसाना .
अजब के रिश्ते आया कैसा जमाना ....
कल तक जो जान था घर की आज बॉडी बन गया
प्यार के नाम खत्म ना होते थे जिसको भुलाने में वह बॉडी में सिमटकर रह गया
बॉडी को यहां से लाओ, बॉडी को अभी उठाओ, बॉडी को स्नान कराओ, बॉडी को ले जाना है,
वाह ! रे दुनिया वाह !तेरा फसाना अजब के रिश्ते आया कैसा जमाना
अजब के रिश्ते बनाए हैं, कल तक जिस से जुदा होने से दिल तार तार होता वह फिसल गया हाथों से अब बस रोना दो चार बार होता
जिसके थोड़ी दूर जाने से मात्र भूख मर जाती थी आज वह जुदा हुआ जिंदगी भर के लिए 1 दिन भी भूखा न रह पाया
सब रिश्तेदार भी आएंगे शोक तेरे संग मनाएंगे
एक-दो दिन तो रहेगी चुप्पी घर पर, फिर मानो वह चैटिंग स्पॉट बन जाएंगे
13 दिन तक यही तमाशा चलेगा, कुछ कोने में बैठ कर सिसकेंगे कुछ खामोश यादों में खो जाएंगे, चारों और लोगों का शोर बहुत होगा
वाह री दुनिया वह तेरा फसाना, अजब के रिश्ते आया कैसा जमाना .....
