इश्क़ और मुसीबत & बीवी से प्यार, पर डर भी थोड़ा
इश्क़ और मुसीबत & बीवी से प्यार, पर डर भी थोड़ा
1.इश्क़ और मुसीबत
इश्क़ किया तो जाना हमने,
मुसीबतों का दर खुला है,
रातें छोटी, दिन हैं लंबे,
बिना बात के बवाल खड़ा है!
पहले थे हम मस्त-मौला,
खाते-पीते, सोते खूब,
अब फोन पे दिन-रात बैठे,
'हाँ जान' की आदत छूटे ना दूर!
पहले पकोड़े, छोले-भटूरे,
जो मन चाहा खा लिया करते,
अब ‘डाइटिंग’ के नाम पे,
सिर्फ सलाद से दिल बहलाते!
पहले कपड़े बस धुले-धुलाए,
जो मिले वही पहन लिए,
अब मैचिंग शर्ट और जूते,
रंगों की लिस्ट बनानी पड़े!
डेट पे जाते, प्यार जताते,
बिल का नंबर जब आँखों में आता,
इश्क़ रोमांटिक था जितना,
उतना ही बैंक बैलेंस घटाता!
फिर भी प्यारा ये इश्क़ का बुखार,
सर पे चढ़कर गाने लगे,
चाहे कितनी मुसीबतें आएं,
हम फिर भी मुस्कुराने लगे!
क्योंकि प्यार बिना ये जीवन अधूरा,
बिन तुम्हारे कुछ भी नहीं,
हाँ, झगड़े हों, खर्चे बढ़े,
पर प्यार से बढ़कर कुछ भी नहीं!
2.बीवी से प्यार, पर डर भी थोड़ा
शादी हुई तो सोचा हमने,
अब तो राजा बन ही गए,
रोज़ मिलेगा प्यार का खाना,
और आराम से सोएंगे!
पर ये क्या, हुक्म चलने लगे,
रात में सपने भी डराने लगे,
"ये मत खाओ, वो मत पहनो,"
बीवी के फ़रमान सुनने लगे!
पहले थे हम शेर बहुत,
दोस्तों में अकड़ दिखाते थे,
अब बीवी के "हाँ जान" पे,
हाथ जोड़कर मुस्कुराते थे!
मोबाइल उठाओ तो शक भारी,
"किससे चैटिंग हो रही प्यारी?"
ख़बरों से ज्यादा पूछताछ उनकी,
CCTV से तेज़ निगाहें जारी!
बजट बने थे ख़र्चे कम के,
पर बीवी की शॉपिंग में दिखा दम के,
"बस ये लास्ट ड्रेस है जानू,"
पर हर हफ़्ते होता नया ग़म के!
फिर भी उसकी हँसी पे जान न्योछावर,
पलभर में ग़ुस्सा जाता उतर,
इश्क़ में हल्का डर ज़रूरी है,
तभी तो मज़ा आता है, मियाँ और बीवी की जंग में हर पहर!

