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Maya Raj

Fantasy Others

4  

Maya Raj

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चांद किस का होगा

चांद किस का होगा

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22 साल की नव्या लेयर्स में कटे अपने लंबे हलके ब्राउन रंग के बालों को झटकते हुए तौलिए से पोंछ रही थी और बालकनी में खड़ी अपार्टमैंट के नीचे मेन गेट से एक आकर्षक स्त्री को दरबान से कुछ पूछते देख रही थी. नहा धो कर अपने धुले हुए कपड़ों को बालकनी में रखे क्लोथ स्टैंड में सुखाते और गीले बालों को धूप दिखाते हुए वह सुबह 9 बजे अपार्टमैंट के नीचे का नजारा भी अकसर ले लेती है. बस, इस के बाद वर्क फ्रौम होम की हड़बड़ी. ओट्स, नूडल, ब्रैड कुछ भी नाश्ते में और लैपटौप खोल कर बैठ जाना.


लखनऊ के इंदिरा नगर के जिस अपार्टमैंट के एक फ्लैट में नव्या रहती है वह चौथे माले पर है. उस में 3 कमरे हैं, तीनों में अटैच लैट, बाथ और बालकनी है. हर कमरे में एसीपंखा, डबल बैड, छोटा सोफा, साइड टेबल, अलमीरा और दीवार में वार्डरोब है यानी संपूर्ण निवास की व्यवस्था है इस फ्लैट में. हौल में बड़ा सोफा, बड़ा टीवी और सैंटर टेबल अपनी निश्चित जगह पर सजी है. कौमन ओपन रसोई की बगल में थ्री सीटर डाइनिंग का भी इंतजाम है, जिस का फिलहाल यहां रहने वाले प्रयोग नहीं करते.गैस कनैक्शन फ्लैट की ओनर लेडी का है और किराएदार सिलिंडर का पैसा चुकाते हैं.


इस फ्लैट में रहने वाले हर किराएदार को 7 हजार महीने के देने पड़ते हैं. इस के अलावा मेड का पैसा यही लोग साझा करते हैं.


नव्या अपने कमरे में पलंग पर औफिस का सामान सजा कर काम करने बैठ चुकी थी. दोपहर 12 बजे वह लंच बनाने के लिए उठेगी और तब शमा से उस की मुलाकात होगी.


कुछ गपशप और साथ रसोई में लंच तैयार करना फिर काम पर बैठ जाना. शमा जिसे नव्या शमा मैम कहती है, नव्या की कंपनी में ही उस से तीन 3 सीनियर टीम मैनेजर है.


नव्या है शोख, चंचल, नाजुक जिसे आजकल गर्ली कहा जाता है, जबकि शमा नव्या से बिलकुल अलग है. 26 साल की सांवलीसलोनी शमा 5 फुट 6 इंच की हाइट के साथ स्ट्रौंग पर्सनैलिटी की धनी है. उसे न तो नव्या की तरह 10 बार सैल्फी ले कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की आदत है, न ही इंस्टा पर अपने फौलोअर्स बढ़ाने को ले कर कोई धुन. वह बिंदास अपने काम और नौकरी में मशरूफ रहती है, कभी मन किया तो घूमनाफिरना या फिर अपनी कोई पसंदीदा मूवी देख लेना. क्लीयर विजन, साफ सोच और तनाव से दूरी. शमा अपनी जिंदगी अपने बूते जीने की दम रखती है.


कोई उस की आलोचना करे, उस के रंग पर टिप्पणी करे, उसे खास फर्क नहीं पड़ता.


नव्या का कमरा हौल के बीच में था, एक ओर शमा का कमरा था, दूसरी ओर का कमरा अभी खाली था.


नव्या औफिस के काम में व्यस्त थी कि मुख्य दरवाजे की घंटी बजी. शमा नव्या की सीनियर थी, प्राइवेट कंपनी के सीनियरजूनियर कल्चर को निभाते हुए दरवाजा अकसर नव्या ही खोला करती थी. दरवाजा खोलते ही मकानमालकिन बिना कुछ कहे उस महिला को अंदर ले आई जिसे अभी कुछ देर पहले नव्या ने नीचे देखा था.


नव्या को मकानमालकिन से बस इतनी जानकारी मिली कि यह अश्विनाजी हैं, नजदीक के सरकारी कालेज में लैक्चरर बन कर आई हैं. अश्विनाजी तीसरे कमरे में किराएदार बन कर आ रही हैं.


नव्या कमरे में चली गई वह कुछ हद तक बोझिल महसूस करने लगी. शमा मैम के साथ उस की लगभग पटरी तो बैठी ही थी, भले गहरी न भी छने लेकिन यह अश्विनाजी पता नहीं कैसी होगी. कहीं ज्यादा रोकटोक, साजसंभाल पर न उतर आए. किशोरी से जुम्माजुम्मा 4-5 साल ही तो हुए थे उसे जवानी की दहलीज पर कदम रखे. आजादी के माने उस के लिए अपनी मरजी से पैर पसार कर जीना था. खैर, जो होगा देखा जाएगा.दूसरे दिन दोपहर तक अश्विना आ गई. एक चौवन इंच के सूटकेस और दो हैंड बैग के साथ वह कमरे में आई और कमरे की साफसफाई में व्यस्त हो गई.


नव्या ने ही दरवाजा खोला था और छोटी सी मुसकराहट के सिवा इन दोनों के बीच कोई और बात नहीं हुई.


लंच के वक्त शमा ने नव्या को भेजा कि लंच के बारे में पूछ ले पर नव्या को अश्विना ने मना कर दिया. दोनों रोज की तरह अपनीअपनी प्लेट ले कर अपनेअपने कमरे में बंद हो गईं.


शाम 6 बजे नहाधो कर गुलाबी और सफेद जोड़ी का ए लाइन सूट पहन अश्विना ने 3 कप कौफी ट्रे में सजा कर शमा और नव्या के कमरे के बंद दरवाजे पर आवाज लगाई.


दोनों अपने कमरे से बाहर आईं तो अश्विना ने कहा, ‘‘मैं अश्विना, मेरी उम्र 32 साल है, आप लोग मुझे दीदी कह सकतीं, मुझे अच्छा लगेगा. आओ कौफी पीती हैं. लंच के वक्त मेरी सफाई पूरी नहीं हुई थी…’’


‘‘अरे हम समझ गई थीं, कोई बात नहीं, चलिए आइए मेरे कमरे में, मेरा अभी कंप्यूटर से हटना मुश्किल है,’’ शमा ने कहा.


शमा और नव्या ने अपनी कौफी ले ली. दोनों शमा के साथ उस के कमरे में आ गईं.


शमा ने दोनों को पास अपने पलंग पर ही बैठा लिया. इन की शाम 8 बजे छुट्टी होती थी. अपनी इच्छा से वे 15 मिनट का टी ब्रेक ले सकती थीं और अभी उसी सुविधा के तहत नव्या अपने काम से कुछ देर के लिए उठ कर यहां आई थी.


तीनों एकदूसरे से घनिष्ठ होते हुए कौफी का आनंद ले रही थीं कि शमा की नजर अश्विना के पेट पर गई. उसे थोड़ा अजीब सा लगा. पेट सामान्य से बड़ा है न या शमा ही गलत देख रही है. देखने से तो अश्विना अविवाहित लग रही थी. शादीशुदा लड़की अकेली इस तरह भला क्यों रहने आएगी? शमा अपनी सोच को विराम दे कर फिर से काम पर लग गई.


अश्विना ने कहा, ‘‘मैं तुम ही कहूंगी तुम दोनों को, ठीक है न?’’


दोनों ने मुसकरा कर सहमति दी तो अश्विना ने कहा, ‘‘मेरा चयन यहां के सरकारी कालेज में बतौर लैक्चरर हुआ है, फिलहाल घर पर ही हूं. जब तक कालेज शुरू नहीं होता, लंच मैं ही बना लूंगी. हम सब अब से थोड़ी देर डिनर टेबल पर ही साथ डिनर करेंगे, लंच भले ही तुम लोग औफिस के काम के साथ ही कर लेना. क्यों यह ठीक होगा न?’’


‘‘अरे नहीं, हम अपना बना लेंगे,’’ नव्या ने कहा तो अश्विना ने कहा, ‘‘यह तो हो गई न पराएपन की बात. मैं आई हूं न तुम दोनों की दीदी. फिर तुम दोनों अपने औफिस का काम करो न. लंच तैयार कर के मैं बुला लूंगी न तुम दोनों को. अकेले नहीं खा पाऊंगी.’’राजपूत हैं, हमारी बिरादरी में लड़कियों को समाज के सिर पर पगड़ी समझ जाता है. हमारी इंसानी रूह पगड़ी बनेबने ही एक दिन खत्म हो जाती है. लेकिन मैं ने ठान रखा था, रस्मरिवाज पर खुद की बलि मैं नहीं चढ़ाऊंगी. मेरी नौकरी लगते ही घर वाले मेरी शादी को उतावले हो गए. इधर मेरी जिंदगी में कुछ नया होना लिखा था. जिस प्राइवेट स्कूल में मैं टीचर थी, वहां के डाइरैक्टर शादाब सर टीचर्स डे पर अपने घर पर टीचरों के लिए पार्टी रखा करते थे.


‘‘शादाब सर की उम्र कोई 45 के पास की होगी, बहुत नेकदिल और मिलनसार थे. इस बार उन के यहां मेरी पहली पार्टी थी. मैं ने गुजराती ऐंब्रौयडरी में आसमानी रंग का पूरी बांह का केडिया टौप और आसमानी रंग का सफेद नीले सितारे जड़ा लहंगा पहन रखा था. मैं अपनी एक टीचर के साथ बात कर रही थी कि शादाब साहब अपने साले साहब को ले कर आए.


‘‘जरा छेड़छाड़ की अदा में मु?ा से मुखातिब हुए और कहा. मैं ने दीया ले कर बहुत ढूंढ़ा लेकिन हमारे साले साहब की बराबरी में आप से बढ़ कर कोई दिखी नहीं. ये हमारे इकलौते साले साहब महताब शेख हैं. नामी बिजनैस मैन और महताब ये हैं हमारे स्कूल की नई कैमिस्ट्री टीचर अश्विनाजी. चलो मैं जरा दावतखाने का देख आऊं, आप लोग मिलो एक दूसरे से.


‘‘शादाब सर के चले जाने के कुछ पल तक हम बेबाक से एकदूसरे के पास खड़े रहे. महताब हलके पीले फूल वाली शर्ट और नेवी डैनिम जींस में गजब के स्मार्ट लग रहे थे. मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच की है, वे 5 फुट 10 इंच के हैं. मुझ से गोरे, चेहरे पर घनी काली दाढ़ी उन्हे मजबूत शख्स बना रही थी.


‘‘पार्टी शादाब सर के बंगले से लगे फूलों के गार्डन में चल रही थी. खूबसूरत रोशनी, संगीत, लजीज खाना और ड्रिंक्स माहौल था, जोश था, चाहतें थीं, सपने थे. महताब ने बात शुरू की, ‘‘आप आसमानी ख्वाब की हूर हो. मुझे अपना पता बता दो.’’


‘‘मैं अंदर ही अंदर चौंक गई. यह व्यक्ति पहली ही मुलाकात में शायरी कर गया, कहीं सही तो होगा न. लेकिन कैमिस्ट्री के सूखे रसायन में झरने की कलकल ध्वनि सुनाई दे गई मुझे और मैं उसी झरने की खोज में चल निकली.


‘‘मुझे भी बोलना आ गया. मैं ने कहा, ‘‘मैं कोई हूर नहीं, आप की नजरों में नूर हूं वरना मुझ जैसी साधारण…’’


‘‘अरे बस, इतना भी मत पिघलो कि मैं थाम न पाऊं, शरारत से जरा सा मुसकराए तो मैं ने पहली बार किसी पुरुष को देख शर्म से नजरें नीची कीं.स्वतंत्रता का निर्णय लिया है? किसी उम्मीद पर घर छोड़ा है कि वे बाद में पसीज जाएंगे. आप ने तसवीर के साथ कुछ लिखा भी था?’’


‘‘लिखा कुछ नहीं, पता भेजा था,’’ अश्विना ने अपने सीने में अपना चेहरा छिपा लिया. शमा समझ रही थी उस के दर्द को.


‘‘दी आप को तो महताबजी याद आने लगे. आप रोक लो खुद को. अभी भी आप सम?ा नहीं. महताबजी की दिलचस्पी आप में रही नहीं. हो सकता है वे किसी और से…’’


‘‘अश्विना ने अपना सिर ऊपर किया, वह उठ कर बैठ गई. शायद शमा के मजबूत इरादे उसे हिम्मत देने लगे थे. उस ने कहा, ‘‘मैं ने आने से पहले पूछा कि क्या हमेशा मेरे साथ रहने की तुम्हारी मंशा नहीं? तुम अपनेआप में व्यस्त रहते हो, मैं कभी कुछ कहती नहीं, कई रातें वापस नहीं लौटते, बताने की जरूरत भी नहीं सम?ाते कि कहां थे, पूछती तो बिना जवाब दिए चले जाते जैसेकि मैं बीवी बनने की कोशिश न करूं. क्या मैं जबरदस्ती रुकी हूं? तुम मु?ो जाने को कहना चाहते हो? बच्चे के आने की खबर पर तुम्हारी कोई प्रतिक्रिया नहीं. बच्चे के लिए क्या हमें अब शादी नहीं करनी चाहिए?’’‘‘अश्विना से अब चुप न रहा गया. वह लगभग चीख ही पड़ी,


‘‘किसी मुसलिम और हिंदू ने शादी की नहीं कि लव जेहाद का मामला बना दिया. बहुत आसान हो गया है न प्यार का कानूनी आड़ में कत्ल कर देना. हम दोनों ने प्रेम किया था, धर्म और जाति देख कर सौदा नहीं किया था. यह और बात है कि लिव इन में किन्हीं व्यक्तिगत कारणों से रहा नहीं गया. पर न हमारी शादी हुई न तो पति ने तलाक दिया. मैं ने खुद उस का घर छोड़ा.


‘‘चाची ने बीच में बेसुरा राग छेड़ा, ‘‘वाह क्या खूब काम किया, बिन ब्याही मां बन गई.’’


‘‘शमा से अब चुप न बैठा गया. उस ने तुरंत कहा, ‘‘अरे किस गली में भटक रही हैं चाची. मुख्य सड़क पर आइए. जब इन्होंने प्यार किया, 6 साल साथ रह कर सुखदुख साँझा किया, तो बच्चा होना कौन सा बड़ा गुनाह है. इस से महताबजी की बेरुखी सहन नहीं हुई और इस ने उस के साथ रहने को इनकार किया. खुद्दारी देखिए जरा. शादी के बाद औरतें क्या करती हैं? पति अनदेखी करे तो परमेश्वर, गाली दे तो परमेश्वर, अपना स्वार्थ साध कर फेंक दे, दूसरी औरतों पर नजर सेंके, परमेश्वर. शादी के बाद तो पति का पत्नी पर जिंदगीभर अत्याचार करने की वसीयत बन जाती है न. और बच्चा शादी के बाद होता है तो कौन सा हमेशा प्यार का फसल होता है? अकसर तो वह पति के पत्नी पर बलात्कार का ही नतीजा होता है. यह बच्चा तो कम से कम प्यार का परिणाम है.’’


चाचा ने अब अपना लौजिक पेश किया, ‘‘खुद मुसलिम है इसलिए मुसलिम की तरफदारी कर रही है.’’


‘‘शमा इन के तर्क शास्त्र की कारीगरी पर सिर पीट रही थी, कहा, ‘‘चाचाजी, आप फिर दिशाहीन बातें कर रहे हैं. मेरी बातें आप को धार्मिक रूप से कट्टर लगीं? आज फिर सुन ही लीजिए, यह बात अश्विना दी को भी मैं बताते हुए रह गई थी. मेरे घर वालों ने मेरा नाम स्वर्णा रखा था. धर्म की आंख से देखिए तो वे हिंदू हैं. मेरी शादी भी हुई जमींदारी ठाकुर घराने में, पति को पुश्तैनी संपत्ति का बड़ा गुरूर था, कामधाम करना नहीं था, बस बापदादाओं की जमींदारी पर मौज और रौब. मेरे घर में पापा और चाचा की बेटियां हुईं 4. हमारा खानदान भी अच्छाभला खातापीता है और परिवार वालों को बेटी से ज्यादा खानदानी हैसियत की पड़ी रहती थी. शादी के वक्त मैं नौकरी कर रही थी और बता दिया था कि नौकरी नही छोड़ूंगी. शादी के बाद ही पति के रंगढंग से तो परेशान हो ही गई, महाशय अपने अहंकार की परवरिश के लिए मुझे नौकरी छोड़ने पर मजबूर करने लगे. मैं समझ गई चाहे अपनी जिंदगी भी दे दूं, इस के साथ मैं एक दिन भी खुश नहीं रह सकती. लेकिन खानदान की पहचान का ऐसा हौआ था कि मैं कहीं निकलने की सोच भी नहीं पा रही थी. एक दिन धोखे से मुझे वह मायके ले आया और हंगामा जो बरपाया कि सारे लोग मुझे ही कोसने लगे. आखिर उन्हें क्या समझती कि मै नौकरी मजे करने और पैसे लुटाने को नहीं कर रही थी. यह मेरे स्वतंत्र निर्णय और पहचान से जुड़ा मसला था.‘‘यही तो गजब की खूबी है तुम में. तुम और लड़कियों की तरह मेल पार्टनर पर दवाब नही बनाती कि एक ही से जिंदगीभर रिश्ता रखे. तुम में गजब का आत्मविश्वास है, इसलिए तुम्हें बुरा नहीं लगता अपने पार्टनर का दूसरी लड़की के साथ भी रिश्ता रखना.’’


‘‘आप को अच्छा लगेगा यदि आप की फीमेल पार्टनर आप के सिवा दूसरे के साथ वही रिश्ता रखे जो उस का आप के साथ है? आप को ठेस तो न पहुंचेगी?’’


महताब उसे एकटक देखता रहा, फिर बोला, ‘‘पहुंच सकती है. मेल इसे अपनी इज्जत पर लेते हैं.’’


‘‘इसलिए क्योंकि वे लड़की को अपनी जागीर समझते हैं, हैं न? जबकि अपनी पार्टनर को बगल में रख दूसरी, तीसरी को भी लिए चलते हैं क्योंकि फीमेल पार्टनर के प्रति पुरुष का नजरिया बराबरी का नहीं होता.’’


‘‘तुम तो नव्या के रहते मेरी जिंदगी में आई,’’ महताब शमा को सम?ाने की कोशिश कर रहे थे. उधर शमा अपने तरीके से आगे बढ़ रही थी. बोली, ‘‘आप अश्विना के साथ रिश्ते में रहते, कितने और रिश्ते में रहे? आप अपने बारे में बताइए तभी मैं आगे बढ़ सकूंगी.’’


‘‘पिछले 2 सालों से अश्विना के अलावा मेरे और 2 संबंध थे, जो टूट गए. नव्या से मेरा रिश्ता हंसीखेल का था.


‘‘आप खेल रहे थे उस के साथ? वह अभी बच्ची ही है आप लगभग 40 साल के.’’


‘‘मैं इस में क्या करूं? उस की मुझ में रुचि थी, मैं उसे जो भी कहता वह तुरंत करने को तैयार रहती. अब अगर वह खुद ही बिछ रही है तो मैं क्यों पीछे रहूं?’’


‘‘और अश्विना के सच्चे प्यार की आप ने कद्र नहीं की? वह क्यों?’’


‘‘अश्विना की बात ही बेकार है. वह चाहती थी, उसी की तरह मैं भी उस का ही नाम जपता रहूं. वह खुद घर छोड़ कर मेरे साथ लिव इन में रही, उसे याद रखना चाहिए था, मैं शादी के ?ां?ाट में नहीं पड़ा ताकि हमारे बीच आजादी बनी रहे. 2 साल से मैं ने उस के साथ रहते दो और लड़कियों से रिश्ते रखे.’’उसे भनक पड़ी?’’


‘‘नहीं क्योंकि मैं इस काबिल हूं कि सब को ले कर चल सकूं.’’


‘‘वाह क्या बात है महताबजी. आप ने तो प्यार, इज्जत, समर्पण, भरोसा हर


चीज का कौन्सैप्ट ही बदल दिया ताकि आप का सैक्सुअल डिसऔर्डर (डिजायर नहीं) संतुष्ट होता रहे.’’


‘‘अश्विना दी और नव्या आप लोग अब मेरे बाथरूम से निकल आओ. आप को महताबजी के बारे में अब तक पूरी जानकारी हो गई होगी,’’ शमा नव्या और अश्विना को अपने बाथरूम से बाहर आ जाने को आवाज दे रही थी. दोनों पूर्व साथियों को कमरे में देख महताब भौचक रह गए. शमा से कहा, ‘‘मैं ने सोचा था तुम मेरे धर्म की हो, अब घर ही बसा लूंगा.’’


‘‘महताबजी, जब धर्म को तवज्जो न दे कर आप सही सोच रखते हैं, तो धर्म के अनुरूप शादी क्यों? ऐसे भी मैं स्वर्णा हूं, जिस ने खुद को प्यार से शमा बुलाया है.’’


महताब जल्दी से जल्दी वहां से निकल गए. अश्विना ने कहा, ‘‘महताब यानी चांद, चांद किसी का न हुआ.’’


‘‘हम अपनेअपने दाग के साथ खुद ही चांद हैं अश्विना दी. फिर अपना चंद्रिम है न. हम 3 का दुलारा आप का बेटा,’’ शमा ने अश्विना और नव्या को अपनी बांहों के घेरे में ले लिया था.


नव्या ने कहा, ‘‘अश्विना दी, आप के बेटे का नामकरण कर दिया शमा मैम ने.’’


अश्विना ने कहा, ‘‘मां के पास बेटे को छोड़ कर आ रही थी तो मां ने उस का नाम सोचने को कहा था. अभी बता देती हूं उस का नाम. शमा का दिया नाम चंद्रिम होगा. कल ही मेरठ जा कर बेटे चंद्रिम को शमा मौसी के पास ले आती हूं.’’


‘‘सांझ के अंधेरे आकाश में उगा चांद उन की खिड़की से झांकता हुआ मुसकराने लगा था.’’


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