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बिना दवाई वाली दवाई

बिना दवाई वाली दवाई

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तन्मय को खेलते समय सर में चोट लग गई थी। डॉक्टर साहब बोल रहे थे ब्रेन का सीफैलिक प्रेशर बढ़ गया है। तन्मय को नींद आनी बन्द हो गयी थी। सर का दर्द भी बढ़ता जा रहा था। आशा की कोई किरण दिखाई नहीं पड़ रही थी। इसी बीच उनके गाँव के डॉक्टर साहब आये। बोले फी के बदले मछली भात खाऊंगा। पर एक शर्त है दवाई खाने के साथ जो कहूँगा करना पड़ेगा। मरता क्या न करता।

डॉक्टर साहब ने तन्मय को पहले दवाई पिलाई, फिर कुदाल दिया। दिन भर खेत में काम करवाया, बोझ ढुलवाया। रात को थका मंदा तन्मय आते ही सो गया।

6 महीने बाद तन्मय ने डॉक्टर साहब से दवाई के बारे में पूछा। डॉक्टर साहब ने हँसते हुए पानी की शीशी आगे बढ़ा दी। बिना दवाई वाली दवाई।


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