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बदलती ज़िंदगी की राह

बदलती ज़िंदगी की राह

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जिंदगी को सभी ने देखा हैं । किसी ने करीब से किसी ने दूर से तो , किसी ने जिंदगी को जिया है। तो किसी ने भोगा हैं।

लेकिन मेरे पास एक कहानी ऐसी भी हैं जिसमे एक लड़की ने जिंदगी के हर उस पहलू को जिया हैं। जिसको बहुत कम लोग महसुस करते हैं या ये कहें की बहुत कम लोग ऐसी जिंदगी जी पातें है। मेरा कहने का मतलब हैं की लोग बीच रास्ते में हिम्मत हार जाते हैं। लेकिन निशा एक ऐसी लड़की हैं जो आज भी अपने और अपने परिवार की खुशियो के लिए अपनी खुशियो का गाला घोटती रही हैं।

एक गांव हैं छोटा सा , वहा एक परिवार रहता हैं। निशा के परिवार में माँ, पापा, उसकी 3 बहिन और 2 भाई हैं । निशा सबसे बड़ी हैं पढ़ाई में बहुत तेज हैं। इस टाइम निशा 5 क्लास में पढती हैं। स्कूल में अध्यापक निशा की बहुत तारीफ करते हैं। निशा स्कूल के हर फेस्टिवल मे बढ़ चढ़ कर भाग लेती हैं।

जब भी एग्जाम रिजल्ट आने वाला होता हैं तभी निशा मातारानी को याद करती हैं वो और उसकी दोस्त बारी बारी माता से पार्थना करती हैं की हम पास हो जाय। हम पास हो जाए । होता भी वैसे ही क्योकि विशवास बहुत बड़ी बात हैं। यहाँ पर निशा की पढ़ाई गाँव से पूरी हो जाती हैं । उसकी माँ उसको उसके मामा के यहाँ पढ़ने भेज देती हैं। क्योकि वहा 10 क्लास तक स्कूल हैं और निशा के गाँव मे केवल 5वी तक स्कूल हैं । कुछ समय बितने पर निशा घर वपिस आती हैं और मामा के यहाँ उसका मन नही लगता तो माँ को आकर बोलती हैमाँ मेरा मन नही लग रहा वहा, मुझे घर वापिस बुला ले।

लेकिन माँ ने उसकी आँखों को नही देखा, न ही कुछ पूछा की मासूम लड़की है, मन क्यों नही लग रहा।

झटके से बोला या मन लगा या पढ़ाई कर बोलकर माँ बाहर चली गई, बस निशा चुपके से उठी और अपनी आँखे पोछी उसी वक़्त उसने अपने मन में ठान ली की कुछ भी हो जाए वो कभी माँ, पापा को नही बोलेगी, यहाँ से निशा अपनी पढ़ाई में लग गई। लेकिन उसके मामा के घर में ना लाइट थी ना पानी का प्रबंध्। उस छोटी सी बच्ची से घर के सारे काम करवाए जाते, जैसे सभी के कपडे धोना, रोटी बनवाना, पानी भरवाना, बर्तन साफ करवाना इत्यादि।

इसके इलावा वो लकड़ी काटती थी। अगर आधी छुटी में घर खाना खाने आए तो उसको खाना नही मिलता था। मिलता केवल काम , की गोबर पड़ा हैं उपले बनाकर जाना ये सब देखकर निशा ने घर आना छोड़ दिया अब रोज वो आधी छुटी होते ही पास के मातारानी के मंदिर जाने लगी और वहा से मिले परशाद से अपना पेट भरने लगी। दिन बीतते रहे और निशा समझदार हो गई । नानी माँ बोलती हैं अब तू बड़ी हो गई ,तुम्हारी शादी करने की उम्र हो गई । निशा को समझ नही आया कुछ और अपनी पढ़ाई क साथ घर के काम करती रही।

निशा ने 10वि पास की लेकिन उसके मार्क्स बहुत काम थे वो इसलिये था क्योकि उसको पढ़ाई की बजाए घर के कामो में ज्यादा लगाकर रखा।

मामा के घर कुछ ऐसा हुआ की अचनाक निशा को वापिस घर बुला लिया गया । वो बहुत खुश थी अपने परिवार में आकर, अब उसको पास की सिटी में दाखिला करवाया गया। निशा और उसकी छोटी बहिन दोनों स्कूल जाते। इस तहरा निशा नें 12वी की पढ़ाई पूरी की। यहाँ से निशा की जिंदगी का दूसरा पहलु सुरु हो गया।

आगे पढ़ने के लिए मुझे कमेंट करे प्लीज । अगर मेरा ये प्रयास अच्छा हैं तो मुझे बताये की में आहे निशा की ज़िन्दगी क हर पहलु को आपके सामने रखु।ं।


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