बड़े लोग
बड़े लोग
जमींदार ने खेत में फसल बो रखी थी।
फसल में खरपतवार निकालने के लिए
खुरपी , दराती का इस्तेमाल होता था।दुनी अपनी गाये के लिए चारा लेने जमींदार के खेत में गई ,हाथ जोड़कर बोली,मै फसल की पगडंडी से घास ले जाऊँ ?जमींदार ने कहा जो फसल में खरपतवार है वो भी ले जाना।
किसान के बेटे जब खेत में से घास काटते तो दराती,खुरपी वहीं छोड़कर आ जाते थे। जब दुनी ने
घास की गठरी बनाई तो चुपके से इधर-उधर देखकर दराती अपनी गठरी में छुपाकर घर ले गई ।
वह बहुत बिमार हो गई थी।गाय भी भूखी रहने लगी थी।दो महीने गुजर गये ,उसने अच्छी तरह रोटी भी नहीं
खाई थी।एक दिन उसके मन में आया जबसे मैं दराती चुरा कर लाई हूँ ये लोहा जबसे घर में आया है तब से
मैं बिमार रहने लगी हूँ।उसने छप्पर में छुपाई हुई दराती निकाली ,दराती की पीतल की मुठ लगी थी जो उसे और भी खूबसूरत बना रही थी।वह दराती लेकर धीरे -धीरे जमींदार के खेत में पहुंच गई ।हाथ जोड़कर बोली जमींदार जी ये आपकी दराती गल्ती से मेरी गठरी में चली गई थी।जमींदार बहुत खुश हुआ बोला-दुनी तं बहुत कमजोर लग रही है।जी मैं दो महीने से बिमार हूँ।
जमींदार ने सो का नोट निकालकर उसे दे दिया और कहा किसी अच्छे डाक्टर को दिखाओ।दवाई ले लो और पैसों की जरूरत हो बताना। दुनी जमींदार की उदारता देखकर नतमस्तक हो गई। वह अपनी भूल के लिए पछता रही थी। बड़े लोगों के दिल भी बड़े होते हैं।
