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Parul Verma

Inspirational


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Parul Verma

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बचपन के लिये ज़रूरी

बचपन के लिये ज़रूरी

1 min 240 1 min 240

आज भी बचपन की कहानी याद आती है

हमारा ख्याल रखती दादी नानी याद आती है


वो किसी धागे से बांध देती थी सारा परिवार

कैसे मिल कर मनाते थे हम सारे त्योहार


वो होली में अनगिनत रंगों में रंग जाना

दशरहे पर मेला सब बच्चो का साथ में जाना


घर मे जाते ही ढूंढते थे बाबा की अलमारी

उन बिस्किट के पैकेट में छुपी थी खुशी हमारी


वो घंटों बाबा से सुनना अपने पूर्वजो की बातें

हँसते खेलते कट जाती थी सारी दिन रातें


अम्मा ने सारे रस्म सारे व्रत सबको सिखाये

वही त्योहार सारे परिवार को जोड़ते आये


नाना नानी ढेरों खिलोने ले कर आना

बच्चों से साथ फिर बच्चो सा बन जाना


आज चाहे रिश्तों में थोड़ी दी दूरी है

बाबा दादी नाना नानी बच्चों के फिर भी जरूरी है।


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